कुलसचिव चयन में बड़ा खेल: VC और रजिस्ट्रार के चारागाह बने विश्वविद्यालय का हाल, गैर विभागीय मंत्री और कुलपति की पसंद !

स्वतंत्र बोल
रायपुर 09 अगस्त 2026.  स्वामी विवेकानंद तकनीकी विश्वविद्यालय (CSVTU) कुलपति और कुलसचिवों का चारागाह बना हुआ है। बीते कुछ वर्षो में यहाँ पदस्थ रहे कुलपति और कुलसचिवों ने विश्वविद्यालय का जी भर का दोहन किया है। यहाँ तकनीकी शिक्षा की जगह जुगाड़ और परिवाद हावी रहा है, पूर्ववर्ती कांग्रेस की सरकार में इस विश्वविद्यालय को आम बोलचाल की भाषा में वर्मा विश्वविद्यालय कहा जाता था, अब लोग इसे BIT विश्वविद्यालय कहने लगे है।

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दरअसल पूर्व में कुलपति डॉ. एमके वर्मा और कुलसचिव डॉ. केके वर्मा थे, दोनों रिश्तेदारों ने विश्वविद्यालय को निजी सम्पतिकी तरह उपयोग किया। के.के. वर्मा रजिस्ट्रार पद से सेवानिवृत हुए तो अंबिकापुर इंजीनियरिंग कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ अंकित अरोड़ा को अक्टूबर 2023 में रजिस्ट्रार का चार्ज दे दिया, डॉ अरोड़ा उनके दामाद बताये जाते है। अंकित को कुलसचिव बनाने शासन स्तर पर ना कोई आदेश जारी हुआ था ना ही कोई निर्देश, केके वर्मा के निर्देश और एमके वर्मा की मौन सहमति पर वे दो सालो तक विश्वविद्यालय का दोहन करते रहे। अगस्त 2025 में बीआईटी कॉलेज में प्रिंसिपल रहे डॉ. अरुण अरोरा को CSVTU में कुलपति बनाया, तो उन्होंने अपनी टीम बनाने शुरू की। तीन महीने बाद नवंबर 2025 डॉ अंकित अरोरा पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों का हवाला देकर उन्हें अंबिकापुर रवाना कर दिया और उनके स्थान पर विश्वविद्यालय के एस्सोसिएट प्रोफ़ेसर अमित राजपूत को प्रभारी कुलसचिव बना दिया गया। दो वर्षो में अंकित अरोड़ा ने नियमो के विपरीत, मनमाफिक काम किया और उन पर करोडो रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप लगा। अंकित ने अपनी धर्म पत्नी डिप्टी वर्मा को भी इसी दौरान CSVTU में पोस्टिंग कर दिया।

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कुलसचिव के लिए दो नाम का पैनल-
डॉ. अरुण अरोरा कुलपति बनने के बाद अपनी टीम बनाने में जुट गए और बीआईटी कॉलेज में मातहत रहे डॉ. राजेश लालवानी को CSVTU का रजिस्ट्रार बनाने पूरी ताकत झोंक दिया। बताते रजिस्ट्रार पद के लिए दो नामो का पैनल शासन स्तर पर भेजा गया था जिसमे डॉ राजेश लालवानी शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय जगदलपुर और दूसरा डॉ अजय त्रिपाठी एचओडी इंजीनियंरिग कॉलेज सेजबहार रायपुर का था। तकनिकी शिक्षा विभाग और मंत्री खुशवंत गुरु के बंगले में बैठे जिम्मेदारों ने लंबी मंत्रणा की और कुलसचिव पद के लिए निर्धारित योग्यता के साथ मापदंड तय किया, जिसमे डॉ राजेश लालवानी फिट हुए और 30 जुलाई को उनका आदेश जारी हो गया।

डॉ. राजेश लालवानी मूलतः उच्च शिक्षा विभाग से और अभी वे प्रोबेशन में है। नवंबर 2027 में उनका परिवीक्षा अवधी समाप्त होगा। वित्त विभाग द्वारा साल 2020 में जारी नियमानुसार प्रोबेशन पीरियड में किसी अधिकारी या कर्मचारी का ट्रांसफर नहीं होगा और उन्हें महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं सौपा जायेगा, इस आदेश को दरकिनार कर लालवानी को तकनीकी शिक्षा विभाग में प्रतिनियुक्ति में लेकर कुलसचिव बना दिया गया। बताते है कि डॉ लालवानी को कुलसचिव बनाने डॉ अरुण अरोरा ने एड़ीचोटी का जोर लगा रखा था, उन्होंने हर वह प्रयास किया जो विश्वविद्यालय के कुलपति को नहीं करना चाहिए। डॉ लालवानी के CSVTU इ कुलसचिव बनने की खबरे जगदलपुर से प्रकाशित समाचार पत्रमे पखवाड़ा भर पहले प्रकाशित हो गया था। डॉ. राजेश लालवानी रजिस्ट्रार और डॉ. अरुण अरोरा कुलपति पद के लिए निर्धारित योग्यता को पूरा नहीं करते है, फिर सिस्टम ने उन्हें महत्वपूर्ण कुर्सी में बैठा दिया है।

 

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