स्वतंत्र बोल
रायपुर 15 फरवरी 2025. प्राचीन जैतूसाव मठ की साढ़े 17 एकड़ जमीन मात्र 2500 रुपये में बिक्री होने के खबरों के बाद सच्चाई सामने आई है। जिसके अनुसार मंदिर ट्रस्ट की जमीन 2500 रुपये में नहीं बल्कि लाखो रुपये में बिकी है। राजस्व कोर्ट में ट्रस्ट प्रबंधन ने जमीन के नामांतरण पर पहले आपत्ति की, फिर बाद में समझौता कर लिया। जिसके बदले में मंदिर ट्रस्ट को करीब 62 लाख रुपये मिला है।
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पहले आपत्ति, फिर समझौता-

स्वतंत्र बोल ने भगवान के घर में हुए खेल की पड़ताल की तो कई चौकाने वाली जानकारी सामने आई। मंदिर ट्रस्ट प्रबंधन ने किसान परिवार द्वारा लगाए जमीन के नामांतरण आवेदन पर नायब तहसीलदार, तहसीलदार और रेवेन्यू बोर्ड में आपत्ति दर्ज किया कि “पंजीकृत बैनामा अवैध और फर्जी है, इसकी जाँच हो।” ट्रस्ट प्रबंधन ने सिविल कोर्ट में केस भी फाइल किया, जिस पर मंदिर ट्रस्ट पर किसान परिवार ने ब्लैकमेल करने आरोप लगाया। किसान परिवार के अनुसार कलेक्टर की अनुमति से बिकी जमीन पर मंदिर ट्रस्ट को आपत्ति करने का अधिकार नहीं है, ब्लैकमेल करने आपत्ति दर्ज कराई गई है। राजस्व न्यायलय से अपने विपक्ष में हुए फैसलों को सुपीरियर कोर्ट में चुनौती देने की बजाये ट्रस्ट प्रबंधन ने गुपचुप तरीके से समझौता कर लिया और बदले में करीब 62 लाख रुपये मिला।
बिल्डर ने ख़रीदा-

राजधानी से लगे दतरेंगा की जमीन का वर्त्तमान मूल्य करोडो रुपये है, जिसे मंदिर ट्रस्ट ने लाखो रुपये लेकर अघोषित तौर पर बेच दिया है। बताते है कि उस जमीन को राजधानी के अविनाश बिल्डर के आनंद सिंघानिया ने खरीदा है। सिंघानिया भविष्य में वहा पर टाउनशिप बना सकते है। मंदिर प्रबंधन के अनुसार जिसके बदले में अविनाश बिल्डर द्वारा चेक और नगदी में भुगतान किया गया है।
स्वतंत्र बोल ने अविनाश ग्रुप के बिल्डर आनंद सिंघानिया से इसकी जानकारी चाही तो उन्होंने साफ़ इंकार कर दिया। जिसके बाद सवाल उठता है कि चेक और नगद से भुगतान करने के बाद भी सिंघानिया आखिर झूठ क्यों बोल रहे है ?

