स्वतंत्र बोल
रायपुर 13 फरवरी 2025. बैंक द्वारा बंधक रखी गई जमीन को बेचने का खुलासा होने के बाद खादी ग्रामोद्योग आयोग और ग्राम सेवा समिति में हड़कंप मचा हुआ है। ग्राम सेवा समिति में अनुमति संबंधी कोई पेपर्स नहीं है, तो अब आयोग भी सरकारी फाइलों से धूल झाड़ने लगा है। जिसके बाद स्वयं-भू मंत्री की मुश्किलें बढ़नी तय है।
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साल 2008 में आमासिवनी की बंधक जमीन को बेचने की शिकायत पर साल 2009 में खादी ग्रामोद्योग आयोग ने जाँच दल गठित किया था। विभागीय सूत्रों के अनुसार अजय तिवारी और उनके सहयोगियों के प्रभाव के चलते जाँच शुरू होने के पहले ही बंद कर दी गई और आयोग के मुख्यालय को जाँच से अवगत नहीं कराया गया। अब 16 सालो बाद जिन्न बाहर आने से ग्राम सेवा समिति के कथित मंत्री और आयोग के अधिकारियो की मुसीबते बढ़ गई है। आयोग ने साल 2009 में सुचना के अधिकार में दिए अपने जवाब में बताया था कि उनके द्वारा जमीन बिक्री की अनुमति नहीं दी गई, और बंधक जमीन को बेचने पर जाँच की जा रही है।” इस लिखित जवाब के बाद आयोग के अधिकारियो की मुसीबते बढ़ गई है। आयोग के अधिकारियो ने छानबीन शुरू कर दिया है।
FIR से बचने इस्तीफा-
साल 2009 में खादी ग्रामोद्योग के अधिकारियो के अनुसार बिना अनुमति जमीन बेचीं गई, ऐसे में अधिकारियो को तत्कालीन अध्यक्ष गायत्री शर्मा और स्वयं भू मंत्री अजय तिवारी के खिलाफ पुलिस में अपराध दर्ज करना था, पर ऐसा नहीं किया गया। जाँच शुरू हुई पर आगे क्या हुआ आयोग के अधिकारियो को इसकी जानकारी नहीं है। उधर जाँच और पुलिसिया कार्यवाही में फसंने की आशंका में तत्कालीन अध्यक्ष गायत्री शर्मा ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे देकर दायित्वों से मुक्त हो गई। बताते है कि जमीन बेचने के बाद मिले पैसो से तर्रा और जरौद में खेती की जमींने, और एक चार पहिया गाडी खरीदी गई। बचत पैसो से गायत्री शर्मा के लिए आलीशान घर बनाया गया। गायत्री शर्मा के बारे में ग्राम सेवा समिति के जिम्मेदार कुछ भी नहीं बता पा रहे है।

पब्लिक ट्रस्ट ग्राम सेवा समिति में हुए भर्राशाही और जारी मनमानी की खुलती परतो से से प्रबंधन में हड़कंप मचा हुआ है। सत्ता पक्ष के नेताओ और प्रभावशाली लोगो के सहारे दामन बचाने की रणनीति का फिर उपयोग किया जा रहा है। बीते दिनों राष्ट्रीय स्कूल के 100 वर्ष पुरे होने पर विधानसभा अध्यक्ष को बतौर मुख्य अथिति आमंत्रित किया गया था। जिन्होंने स्कूल के नए भवन का उद्घाटन किया।
