पेड़ से गिरने से टूटा था किशोर का पैर, अधीक्षिका को सस्पेंड करने संचालक को पत्र.. परिवीक्षा अधिकारी ने बताया भ्रामक।

स्वतंत्र बोल
रायपुर 21 मई 2026.  बाल सम्प्रेषण गृह में अपचारी बालक के पैर टूटने की घटना पर सम्प्रेषण गृह की अधीक्षिका को जिम्मेदार ठहराया गया है। डीपीओ ने अधीक्षिका पर अनुशासनात्मक कार्यवाही करने संचालक महिला बाल विकास को पत्र लिखा है, पर सप्ताह भर बाद भी कार्यवाही लंबित है। माना स्थित बाल सम्प्रेषण गृह में धमतरी के अपचारी बालक को 24-25 अप्रैल को संस्था के अधीक्षिका रीता चौधरी और परिवीक्षा अधिकारी मनीष सोनी ने आचार बनाने आम तोड़ने पेड़ पर चढ़ाया था, पेड़ से गिरने से बालक का पैर टूट गया, संस्था के पैरा मेडिकल स्टाफ हेमसागर ने पंडरी जिला अस्पताल में घ्याल बालक का ईलाज कराया जहा उसके पैर में प्लास्टर लगाया गया।

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बाल संप्रेषण गृह में बच्चे का पैर टूटा, आम तोड़ने पेड़ में चढ़ा था किशोर !

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डीपीओ ने संचालक को बताया-
जिला कार्यक्रम अधिकारी शैल ठाकुर ने 14 मई को संचालक महिला बाल विकास रेणुका श्रीवास्तव को रिपोर्ट भेजा जिसमे लिखा कि

“संस्था में घटित घटना की जानकारी दिनांक 04 को समीक्षा बैठक के दौरान (दस दिनों बाद) अधीक्षिका रीता चौधरी ने दी। उसके पहले उन्हें कोई लिहित जानकारी नहीं दी गई, ना ही अपचारी घायल बालक का कथन/बयान लिया गया..अधीक्षिका चौधरी ने घटना को छिपाते रही और किसी भी जिम्मेदार पर कार्यवाही नहीं की। अधीक्षिका का बयां संतोषजनक नहीं है, ऐसे में अनुशासनात्मक कार्यवाही की अनुशंसा की है।”

सम्प्रेषण गृह के अपचारी बालक के पैर टूटने की घटना को महिला बाल विकास अधिकारियो ने बेहद हल्के में लिया। अगर बच्चे की मौत हो जाती तब शायद अधिकारियो के लिए बड़ी घटना होती.. विभागीय अधिकारी बालक के पैर टूटने की घटना से इंकार करते रहे, उल्टे Swatantrabol.com की खबरों मिथ्या साबित करने में जिला स्तर के अधिकारी कर्मचारी जुटे रहे। किशोर न्याय बोर्ड की सदस्यों ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा कि बच्चे का पैर आम पेड़ से गिरने पर टूटना पाया। विभागीय अधिकारी घटना की लीपापोती का हर संभव प्रयास किये, बताते है कि अपचारी बालक को बयान बदलने दबाव भी डाला गया था।

जिला कार्यक्रम अधिकारी की भूमिका-
24-25 अप्रैल की घटना की जानकारी जिला कार्यक्रम अधिकारी को 04 मई तक नहीं मिली, जबकि Swatantrabol.com ने 30 अप्रैल को इसकी खबर प्रकाशित किया था, तब जाकर विभागीय कुम्भकर्ण नींद से जागे। ऐसे में डीपीओ की कार्यप्रणाली पर सवाल उठता है कि राजधानी से 18 किलोमीटर दूर माना के बाल गृह में घटना होने की जानकारी उन्हें इतनी देरी से क्यों मिली ? जबकि उसी रास्ते से प्रतिदिन नवा रायपुर आवाजाही जिम्मेदार करते है। जब मीडिया में खबरे आई तो क्या उन्होंने मौके का निरिक्षण किया? डीपीओ ने सरंक्षण अधिकारी सपना सिंह को 13 मई को घायल अपचारी बालक का कथन लेने भेजा, स्वयं नहीं गई।

 

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परिवीक्षा अधिकारी का स्पष्टीकरण-
संस्था में विगत 09 वर्षो से संविदा में पोस्टेड मनीष सोनी ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि 25 अप्रैल की रात्रि 1.30 बजे उसे बच्चे के खेलते-खेलते चोटिल होने की जानकारी मिली। उसे हेमसागर ने जिला अस्पताल में इलाज कराय जहा सपोर्ट के लिए प्लास्टर लगाया गया था। आम पेड़ में गिरने और पैर टूटने की खबर भ्रामक और मिथ्या है, उसकी छवि ख़राब करने की कोशिश की जा रही है। ऐसी कोई घटना ही नहीं हुई, इस घटना में मेरी कोई प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कोई भूमिका नहीं है। किशोर न्याय बोर्ड के सदस्यों और संस्था से जुड़े लोगो के अनुसार मनीष सोनी ने ही बालक को बयान बदलने दबाव डाला था। सोनी ने किशोर न्याय बोर्ड के सेक सदस्य के साथ नोक-झोक भी हुआ था। डीपीओ ने परिवीक्षा अधिकारी को अभयदान देते हुए अधीक्षिका को सस्पेंड करने की अनुशंषा की है।

 

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