स्वतंत्र बोल
रायपुर 15 फरवरी 2025. नगरीय निकाय चुनाव में बीजेपी ने अभूतपूर्व जीत हासिल की है। बीजेपी ने नगर निगम, नगर पालिक परिषद् और नगर पंचायतो में विजयी परचम लहराया है। इन सबके बीच कुनकुरी, पाटन और चिरमिरी के परिणामो ने हैरान किया है। पाटन नगर पंचायत पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का विधानसभा क्षेत्र है, जहाँ से कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा है। सरकार में रहते पाटन कांग्रेस का गढ़ बन गया था, जहा बीजेपी ने केसरिया झंडा फहरा दिया है। उधर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गृह जिला जशपुर के कुनकुरी नगर पंचायत में कांग्रेस ने फतह हासिल की है। कांग्रेस के विनयशील ने बीजेपी उम्मीदवार को हराया है। मतगणना के पूर्व बीजेपी नेता चिरमिरी और कोरबा को छोड़कर अधिकांश निगमों में चुनाव जीतने के प्रति आश्वश्त थे। उन्हें इन्ही दोनों जगहों से उम्मीदें थी, पर अंत में यहाँ भी निराशा ही मिली।
कोयला नगरी चिरमिरी नगर पालिक निगम को लेकर कड़ा मुकाबला था। यहाँ कांग्रेस ने पूर्व विधायक विनय जायसवाल को उम्मीदवार बनाया था तो बीजेपी ने रामनरेश राय को। विनय जायसवाल मनेंद्र गढ़ से पूर्व विधायक थे, तो उनकी पत्नी कंचन जायसवाल यहाँ से मेयर थी। पेशे से डॉक्टर विनय जायसवाल ने विधानसभा चुनाव हारने के बाद निगम की राजनीती में भाग्य आजमाया जहा भी उन्हें निराशा मिली। धन धान्य से समृद्ध जायसवाल के दावेदारी के बाद बीजेपी के नेता चिंतित थे। बीजेपी ने यहाँ चुनाव प्रभारी स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल को चुनाव संचालक बनाया था। मतदान के सप्ताह भर पहले वहा माहौल बीजेपी के विपक्ष में मिल रही थी।
दरअसल बीजेपी नेताओ को अंदरूनी खाने जानकारी मिली कि कांग्रेस उम्मीदवार और चुनाव संचालक के बीच गहरी मित्रता है, और यह बात किसी से छुपी नहीं है। ऐसे में कांग्रेस के पूंजीपति उमीदवार के सामने कमजोर उम्मीदवार उतारने का एक कारण भी यह हो सकता है। बताते है कि बीजेपी संगठन मंत्री पवन साय और अजय जम्वाल ने एक दिन चिरमिरी में कार्यकर्ताओ से मिले और फिर बाद स्वास्थ्य मंत्री को सचेत किया। जिसके बाद तो चुनाव का माहौल ही बदल गया, संगठन मंत्री के निर्देशों के बाद मंत्री घर घर जाकर वोट की अपील की, नतीजा बीजेपी उम्मीदवार की 5000 से अधिक वोटो से जीत हुई।
रायपुर नगर निगम में पूर्व महापौर रहे ऐजाज ढेबर चुनाव हार गए। ढेबर पार्षद का चुनाव लड़ रहे है, जहा बीजेपी उम्मीदवार ने करारी शिकश्त दी है, वही उनकी पत्नी अंजुमन ढेबर चुनाव जीतकर पार्षद बनी है। ढेबर अपने वार्ड को छोड़कर दूसरे वार्ड में चुनाव लड़ रहे थे, जिसके चलते दोनों ही वार्ड संवेदनशील हो गए थे और स्थानीय बीजेपी के रणनीतिकारों का पूरा फोकस इन्ही दोनों वार्डो में रहा।





