जहां कभी लगती थी नक्सलियों की जन अदालत, वहीं इमली के पेड़ तले बैठे CM साय… बदली तस्वीर ने सबको चौंकाया

स्वतंत्र बोल
बीजापुर 02 जून 2026: कभी जिस गांव में नक्सलियों की जन अदालत लगती थी और लोगों की जिंदगी भय के साए में गुजरती थी, आज उसी जगह मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जनचौपाल लगाकर ग्रामीणों से सीधा संवाद किया। बीजापुर जिले के कोंडपल्ली गांव में मंगलवार को सुशासन तिहार 2026 के दौरान सामने आया यह दृश्य क्षेत्र में बदलते हालात और विकास की नई दिशा की कहानी बयां करता नजर आया।

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मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर कोंडपल्ली पहुंचा तो गांव में उत्साह का माहौल देखने को मिला। इमली के पेड़ के नीचे आयोजित जनचौपाल में मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं और सड़क, बिजली, पेयजल तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम में जिले के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

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जनचौपाल के दौरान ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को बताया कि एक समय ऐसा था जब पूरा इलाका नक्सलियों के प्रभाव में था और लोग डर के माहौल में जीवन बिताते थे। लेकिन अब गांवों तक सड़कें पहुंच रही हैं, स्कूल और आंगनबाड़ी संचालित हो रहे हैं तथा पेयजल जैसी सुविधाएं भी बेहतर हो रही हैं। इससे क्षेत्र में विकास और विश्वास का माहौल बना है।

कोंडपल्ली वही गांव है जहां कभी नक्सलियों की जन अदालतें लगती थीं। अब नक्सल प्रभाव कम होने के बाद यहां विकास कार्यों की रफ्तार बढ़ी है। सरकार द्वारा सड़क, अस्पताल, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए लगातार काम किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मीडिया से बातचीत में कहा कि नक्सलवाद के कारण वर्षों तक इस क्षेत्र के आदिवासी विकास की मुख्यधारा से दूर रहे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की इच्छाशक्ति से नक्सलवाद के खिलाफ प्रभावी अभियान चलाया गया, जिसके सकारात्मक परिणाम अब दिखाई दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब सरकार की योजनाओं का लाभ सीधे ग्रामीणों तक पहुंचाया जाएगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि विकास का कोई भी लाभार्थी वंचित न रहे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि क्षेत्र के विकास और लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए सरकार लगातार प्रयास करती रहेगी।

सुशासन तिहार के दौरान कोंडपल्ली में हुई यह जनचौपाल केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि उस बदलती तस्वीर का प्रतीक बनकर उभरी, जहां कभी बंदूकों की आवाज गूंजती थी और आज विकास, संवाद और विश्वास की बात हो रही है।