स्वतंत्र बोल
रायपुर 02 जून 2026: छत्तीसगढ़ के चर्चित फर्जी आईटीसी घोटाले में जांच एजेंसी को बड़ी सफलता मिली है। करोड़ों रुपये के कथित टैक्स फर्जीवाड़े की जांच कर रही डीजीजीआई रायपुर की टीम ने उत्तरप्रदेश के शाहजहांपुर से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उसने बोगस फर्मों का नेटवर्क खड़ा कर 12.5 करोड़ रुपये का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) हासिल किया और उसे आगे ट्रांसफर किया।
जानकारी के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान कुलदीप उर्फ अभिषेक पाठक के रूप में हुई है। जांच एजेंसी के मुताबिक उसका नाम छत्तीसगढ़ में चल रही फर्जी आईटीसी जांच के दौरान सामने आया था। उसे पूछताछ के लिए कई बार नोटिस भेजे गए, लेकिन वह जांच में शामिल नहीं हुआ। इसके बाद डीजीजीआई की टीम उत्तरप्रदेश के शाहजहांपुर जिले के अतिबरा गांव पहुंची और पूछताछ के बाद उसे गिरफ्तार कर लिया।
स्क्रैप कारोबार की आड़ में करोड़ों का खेल!
जांच में सामने आया है कि आरोपी ने कथित तौर पर रायपुर निवासी अमन सिंह के साथ मिलकर स्क्रैप कारोबार से जुड़ी कई फर्मों का संचालन किया। आरोप है कि इन फर्मों के माध्यम से कागजों में लेन-देन दिखाकर फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट हासिल किया गया और फिर उसे अन्य संस्थाओं तक पहुंचाया गया।
परिवार के नाम पर बनाई गईं फर्में
जांच एजेंसियों को यह भी पता चला है कि आरोपी ने अपने परिवार के सदस्यों के नाम पर कई फर्में खड़ी की थीं। इनमें समृद्धि ट्रेडिंग और ख्याति इंटरप्राइजेज जैसी फर्मों के नाम सामने आए हैं। अधिकारियों को संदेह है कि इन कंपनियों का इस्तेमाल भी फर्जी टैक्स क्रेडिट के लेन-देन में किया गया।
16 करोड़ से ज्यादा के नेटवर्क की जांच
डीजीजीआई के अनुसार जांच अब केवल 12.5 करोड़ रुपये तक सीमित नहीं है। अधिकारियों को ऐसे संकेत मिले हैं कि पूरा नेटवर्क 16 करोड़ रुपये से अधिक के संदिग्ध टैक्स क्रेडिट लेन-देन से जुड़ा हो सकता है। आशंका जताई जा रही है कि यह नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ है और जांच आगे बढ़ने के साथ कई नए नाम सामने आ सकते हैं।
कार्रवाई के दौरान जांच टीम ने आरोपी के ठिकाने से महत्वपूर्ण दस्तावेज, मोबाइल फोन और अन्य रिकॉर्ड भी जब्त किए हैं। इनकी फोरेंसिक और तकनीकी जांच के बाद नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका स्पष्ट होने की उम्मीद है।
नई टीम, पहली बड़ी गिरफ्तारी
यह गिरफ्तारी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि डीजीजीआई रायपुर के प्रधान अतिरिक्त महानिदेशक सुजीत मलिक द्वारा 18 मई 2026 को पदभार संभालने के बाद यह पहली बड़ी कार्रवाई है। इसे फर्जी आईटीसी नेटवर्क के खिलाफ एजेंसी के सख्त रुख के रूप में देखा जा रहा है।
अभी और खुलासे बाकी!
जांच एजेंसी का मानना है कि यह मामला केवल एक आरोपी तक सीमित नहीं है। दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की पड़ताल जारी है। अधिकारियों के अनुसार आने वाले दिनों में इस घोटाले से जुड़े और बड़े खुलासे तथा नई गिरफ्तारियां हो सकती हैं। करोड़ों रुपये के इस टैक्स फर्जीवाड़े ने एक बार फिर फर्जी फर्मों के जरिए चल रहे संगठित नेटवर्क पर सवाल खड़े कर दिए हैं।


