घोटालेबाजो को ऐसे मिला सरंक्षण: मीडिया को रोकने परिसर में तैनात किया गार्ड, परिसर में सीसीटीवी लगाकर वीडियोग्राफी बैन कर दिया.. गुंडों के सहारे मीडिया पर दबाव बनाने की नाकाम कोशिश।

स्वतंत्र बोल
रायपुर 05 मई 2025.  राजधानी के जिला सहकारी बैंक में हुए करोडो के घोटाले पर कई दौर की जाँच के बाद अंततः साल भर बाद कार्यवाही हुई। स्वतंत्र बोल ने घोटाले से पर्दा उठाया और लगातार इस घोटाले की परते उखाड़ा जिसका परिणाम हुआ कि बैंक के 24 कर्मियों पर कार्यवाही हुई है। बैंक की स्थापना के बाद यह सब से बड़ी कार्यवाही है, जिसमे 15 बैंककर्मियों का इन्क्रीमेंट रुका, 6 बर्खास्त हुए और 3 का डिमोशन हुआ। जिला सहकारी बैंक लूट और भ्रष्टाचार का अड्डा बना हुआ है, अक्टूबर 2023 में बैंक प्रबंधन ने मजबूरीवश अपराध दर्ज कराया था। बैंक प्रबंधन के जिम्मेदार तब भी घोटालेबाजो पर कार्यवाही नहीं चाहते थे, और अपराध दर्ज करवाकर मामला ठंडा करने में जुटे रहे।

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स्वतंत्र बोल ने मार्च 2024 में इस घोटाले को उधेड़ना शुरू किया तो हड़कंप मचा। घोटाले में दो दर्जन से अधिक बैंककर्मी शामिल थे, इसीलिए प्रबंधन नहीं चाहता था कि बात आगे बढे। बैंक प्रबंधन ने हम पर दबाव बनाने अनेको हथकंडे अपनाये, बैंक परिसर में गुण्डेनुमा कर्मचारियों से घेराबंदी कराने की कोशिश की। देवेंद्र पांडेय, आईके ठाकुर, युवराज दुबे, चंद्रवंशी जैसे वर्षो से एक ही जमे कर्मियों को आगे कर सीईओ अपेक्षा व्यास ने विवाद की स्थिति निर्मित की। मीडिया को रोकने बैंक परिसर में बदूकधारी गार्ड की तैनाती की गई, बैंक परिसर में वीडियो बनाने और फोटो लेने पर प्रतिबंध लगा दिया गया, बैंक परिसर के हर कोने में सीसीटीवी लगाया गया जिसका कंट्रोल कमांड सीईओ के चेंबर में है।  मीडिया पर दबाव बनाने में कोईकसर घोटालेबाज कर्मियों और सीईओ ने नहीं छोड़ा था।

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दरअसल बैंक में हुए घोटाले में सभी प्रभावशाली कर्मचारी शामिल है, जो वर्षो से बैंक में मलाईदार कुर्सियों पर जमे है। कई सीईओ और बैंक के अध्यक्ष बदले.. पर कभी उनकी कुर्सियों पर आंच नहीं आई। अहंकार और घोटाले के पैसो से आत्ममुग्ध कर्मियों ने सहकारिता विभाग के उच्चस्थ अधिकारियो को कभी गंभीरता से नहीं लिया।

30 अप्रेल को हुई स्टाफ कमेटी की बैठक का निर्णय आज दिनांक (खबर लिखे जाने तक) सार्वजनिक नहीं किया गया कि किन किन कर्मचारियों का वेतनवृद्धि और कितना रोका गया ? स्टाफ कमेटी की पेशी से नदारद कर्मियों पर क्या कार्यवाही हुई ? अशोक पटेल और मोहन साहू को आखिर अभयदान क्यों मिला ? ऐसे अनेको सवाल है जिसका जवाब बैंक प्रबंधन सार्वजानिक नहीं करना चाहता। स्टाफ कमेटी की बैठक समाप्त होने के दो दिनों बाद भी 2 मई की रात 9 बजे तक कार्यवाही विवरण जारी नहीं किया गया था, जबकि पंजीयक ने तत्काल प्रेस नोट जारी करने का निर्देश दिया था। जब इसकी खबर 2 मई की रात 9.15  को पब्लिश हुआ तो नाराज पंजीयक ने सीईओ को जमकर फटकारा, जिसके बाद ही मीडिया को प्रेस रिलीज जारी किया गया।

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दरअसल बैंक सीईओ और उनके सिपहसालार कार्यवाही में गुणदोष देख रहे थे, बताते है कि 2 मई को सीईओ अपेक्षा व्यास संयुक्त पंजीयक डीपी टावरी से मार्गदर्शन लेने गई जहां उन्हें थोड़ा होल्ड करने कहा गया था। छुट्टी के दिन भी स्थापना के कर्मचारी लिखा पढ़ी करते रहे और अंततः 5 मई को बर्खास्त हुए कर्मियों का आदेश जारी हुआ है।