स्वतंत्र बोल
बिलासपुर, 16 अप्रैल 2026: शहर में धुएं के साथ एक खतरनाक साजिश भी फैल रही थी। बाहर से सब कुछ असली दिखने वाला ‘गोल्ड फ्लैक’ असल में नकली निकला, जो लोगों की सेहत के साथ बड़ा खिलवाड़ कर रहा था। इस पूरे खेल का खुलासा होते ही हड़कंप मच गया है।
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व्यापार विहार के मालधक्का इलाके में नकली सिगरेट की सप्लाई का बड़ा नेटवर्क पकड़ा गया है। दिल्ली से आई आईटीसी कंपनी की टीम ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करते हुए इस अवैध कारोबार का पर्दाफाश किया।
दरअसल, कंपनी को पहले से ही सूचना मिल रही थी कि बाजार में नकली सिगरेट बेची जा रही है। इस पर टीम ने शहर में अलग-अलग पान ठेलों और दुकानों से सैंपल इकट्ठा किए। जांच में साफ हो गया कि जो सिगरेट लोग खरीद रहे हैं, वह असली नहीं है।
इसके बाद टीम ने खुद ग्राहक बनकर सप्लायर तक पहुंचने की रणनीति बनाई। संपर्क करने पर उन्हें महाराणा प्रताप चौक के पास निगम कॉलोनी बुलाया गया, जहां से थोक में माल दिया जा रहा था।
जैसे ही टीम मौके पर पहुंची और रोशन चंदानी की फर्म में रखे स्टॉक की जांच की, सच्चाई सामने आ गई—पूरा माल नकली था।
कार्रवाई के दौरान करीब 5 लाख रुपये कीमत की चार कार्टून सिगरेट जब्त की गई। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी लंबे समय से शहर के कई दुकानदारों को यह नकली सिगरेट सप्लाई कर रहा था।
टीम ने जब्त माल को सिविल लाइन थाने में सौंप दिया है और पूरे मामले की जानकारी पुलिस को दे दी गई है।
सूत्रों के मुताबिक, यह अवैध कारोबार रोजाना 2 लाख रुपये से ज्यादा का हो सकता है, यानी हर दिन बड़ी संख्या में लोग अनजाने में नकली सिगरेट पी रहे थे।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि असली और नकली सिगरेट में फर्क करना आसान नहीं होता। पैकेजिंग, होलोग्राम, कोड और स्वाद में मामूली बदलाव के जरिए इस धोखे को अंजाम दिया जा रहा था।
अब सवाल यही है—क्या यह नेटवर्क सिर्फ बिलासपुर तक सीमित है, या इसके तार और भी बड़े बाजारों तक फैले हुए हैं, जहां हर कश के साथ एक नया खतरा लोगों के शरीर में उतर रहा है।
