स्वतंत्र बोल
सक्ती, 16 अप्रैल 2026:वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण बॉयलर ब्लास्ट के बाद अब मामला सिर्फ हादसा नहीं रह गया है, बल्कि गंभीर सवालों और आरोपों के घेरे में आ गया है। घटना के बाद आज कांग्रेस की जांच कमेटी ने प्लांट का दौरा किया, जहां जो तस्वीर सामने आई, उसने पूरे मामले को और ज्यादा सस्पेंस और शक के घेरे में डाल दिया है।
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प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के नेतृत्व में पहुंची टीम ने प्लांट की कार्यप्रणाली, उसकी उम्र और सुरक्षा इंतजामों पर कई चौंकाने वाले सवाल खड़े किए। बैज ने सीधे तौर पर कहा कि यह प्लांट करीब 11 साल पुराना स्ट्रक्चर है, जिसे लंबे अंतराल के बाद चालू किया गया—लेकिन क्या इस दौरान इसकी सही तरीके से जांच हुई थी?
उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्लांट एक साल पहले शुरू हुआ, तो क्या उसकी कमीशनिंग पूरी तरह सुरक्षित तरीके से की गई थी? इतने सालों तक खड़े रहे ढांचे में कहीं जंग, क्रैक या तकनीकी खामियां तो नहीं थीं? क्या बॉयलर के प्रेशर सिस्टम की जांच हुई थी या इसे नजरअंदाज कर दिया गया?
जांच कमेटी ने यह भी आरोप लगाया कि प्लांट में तय क्षमता से अधिक उत्पादन किया जा रहा था, जिससे जोखिम और बढ़ गया। साथ ही यह भी पूछा गया कि क्या किसी थर्ड पार्टी एजेंसी से सुरक्षा ऑडिट कराया गया था या नहीं।
दीपक बैज ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि प्रदेश में लगातार इस तरह के औद्योगिक हादसे बढ़ते जा रहे हैं और अब तक ऐसे मामलों में 300 से अधिक मजदूर अपनी जान गंवा चुके हैं। ऐसे में सवाल उठता है—क्या मजदूरों की जान इतनी सस्ती हो गई है?
उन्होंने सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इतनी बड़ी घटना के बाद भी जवाबदेही तय नहीं हो रही है। “यह सिर्फ लापरवाही है या फिर किसी बड़ी साजिश की तरह की गई अनदेखी?”—यह अब जांच का सबसे बड़ा विषय बन गया है।
इस दौरान नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल समेत कई विधायक और कांग्रेस नेता मौजूद रहे।
गौरतलब है कि इस हादसे में अब तक 20 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 15 से ज्यादा घायल अब भी अस्पतालों में जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। मृतकों में 5 छत्तीसगढ़ के और 15 अन्य राज्यों के मजदूर शामिल हैं।
अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में सामने आने वाला सच क्या इस हादसे की असली वजह उजागर करेगा, या फिर यह मामला भी कई अनसुलझे सवालों के साथ दबकर रह जाएगा।
