स्वतंत्र बोल
रायपुर 28 जनवरी 2025. राजधानी के जिला सहकारी बैंक में हुए करोडो के गबन की फाइल ठन्डे बस्ते में चली गई है। बैंककर्मियों द्वारा सुनियोजित तरीके से की गई लूट पर बैंक प्रबंधन कई दौर की जाँच के बाद भी कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं कर पाया है। बैंक सीईओ द्वारा बनाई गई जाँच समिति ने महीनो पहले जाँच प्रतिवेदन सौप दिया था। उधर पंजीयक द्वारा बनाई गई विशेष ऑडिट टीम छह महीने बाद भी ऑडिट पूरा नहीं कर पाया है। पंजीयक ने तीन महीने के भीतर विशेष ऑडिट कर रिपोर्ट माँगा था, बताते है कि शुरुआत में विशेष ऑडिट टीम ने शुरुआत में जाँच पड़ताल शुरू किया था, और खातिरदारी के बाद आगे नहीं बढ पाए नतीजा छह महीने बाद विशेष ऑडिट अधूरा है। उधर जिला सहकारी केंद्रीय बैंक दुर्ग और बिलासपुर में प्राधिकृत अधिकारियो (कलेक्टर्स) द्वारा की गई कार्यवाही से दोनों बैंको में थोड़ा सुधार हुआ है, किसानो से पैसे मांगने वाले और बैंक में घोटाला करने वाले कर्मियों ने अपना आदत सुधारने में जुटे है। ऐसे ही कार्यवाही की उम्मीद जिला सहकारी बैंक रायपुर में थी, पर ना जाने किन कारणों से प्राधिकृत अधिकारी हिम्मत नहीं जुटा पा रहे है। राजधानी में पंजीयक सहकारी संस्थाए ही प्राधिकृत अधिकारी है।
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दुर्ग और बिलासपुर में हड़कंप-

जिला सहकारी केंद्रीय बैंक दुर्ग और बिलासपुर में स्टाफ कमेटी के निर्णय पर प्राधिकृत अधिकारी द्वारा की गई कार्यवाही से हड़कंप मचा हुआ है। दो महीने पहले जिला सहकारी बैंक बिलासपुर में प्राधिकृत अधिकारी (कलेक्टर) अवनीश शरण के निर्देशों पर दर्जन भर से अधिक बैंककर्मियों पर कार्यवाही की गई थी, तो दुर्ग में कलेक्टर ऋचा प्रकाश चौधरी ने घोटाला करने वाले 09 कमर्चारियों को बर्खास्त कर मेसेज दिया था। राजधानी में भी वर्षो से घोटाला करने वाले दो दर्जन कर्मियों पर कार्यवाही की जानी है, पर स्टाफ कमेटी निर्णय नहीं ले पा रही है। आईएएस कुलदीप शर्मा वर्तमान में पंजीयक सहकारी संस्थाए और प्राधिकृत अधिकारी है।
संविदा देने की बैठक-
बैंक में बीते डेढ़ सालो से प्राधिकृत अधिकारी की नियुक्त है, जिसके निर्देशन में ही स्टाफ कमेटी की बैठक होती है। बैंक में स्टाफ कमेटी की आखिरी बैठक दिसंबर 2024 में हुई थी, जिसमे दो कर्मियों को संविदा नियुक्ति देने का प्रस्ताव पारित किया गया था .बैठक में बैंक में बढ़ते गड़बड़ी, घोटालो पर चर्चा नहीं हुई.. बताते है कि स्टाफ कमेटी में घोटाला करने वाले कर्मचारियों पर कार्यवाही, जाँच रिपोर्ट संबंधी प्रकरण सीईओ ने नहीं रखा, जिसके बाद उन पर चर्चा नहीं हुई। जबकि जाँच दिसंबर 2024 में पूर्ण हो चुकी थी। जिसके बाद एक चर्चा चल पड़ी है कि अपनों को संविदा देने ही स्टाफ कमेटी की बैठक आयोजित की गई थी। श्रीमती अपेक्षा व्यास ने दुर्ग में सीईओ रहते गड़बड़ी और घोटाले संबंधी प्रकरणों को स्टाफ कमेटी में नहीं रखा था, दरअसल सीईओ द्वारा घोटालेबाजो को बचाने ऐसा किया गया था। अगर सही समय पर स्टाफ कमेटी में फाइलें रखी जाती तो साल 2016 से साल 2023 तक गड़बड़ी करने वाले कर्मियों पर साल 2025 के पहले कार्यवाही हो जाती।

