छोटे गांव की बेटी ने रचा ऐसा इतिहास, विरोधियों पर टूटी कहर बनकर—अब सम्मान में मिली रिकॉर्ड प्रोत्साहन राशि

स्वतंत्र बोल
रायपुर, 18 अप्रैल 2026:
 कबड्डी के मैदान में विरोधियों के लिए ‘खतरा’ बन चुकी छत्तीसगढ़ की बेटी संजू देवी अब एक और बड़ी वजह से चर्चा में हैं। उनके दमदार प्रदर्शन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश को गौरवान्वित करने के बाद राज्य सरकार ने उन्हें 50 लाख रुपए की भारी-भरकम प्रोत्साहन राशि से सम्मानित किया है। नवा रायपुर में आयोजित समारोह में उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने खुद यह चेक सौंपा—जो राज्य में किसी खिलाड़ी को पहली बार इतनी बड़ी राशि दी गई है।


मैदान में ‘तूफान’, विरोधियों के लिए बन गई डर का नाम
संजू देवी ने कबड्डी विश्व कप और एशियन चैंपियनशिप में जिस तरह का प्रदर्शन किया, उसने उन्हें सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं बल्कि विरोधी टीमों के लिए एक ‘खौफ’ बना दिया। नवंबर 2025 में बांग्लादेश में आयोजित कबड्डी विश्व कप में उन्हें मोस्ट वेल्युबल प्लेयर चुना गया था। फाइनल और सेमीफाइनल जैसे निर्णायक मुकाबलों में उन्होंने ऐसे अंक जुटाए, जिसने मैच का रुख पलट दिया।


छोटे गांव से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का ‘खतरनाक सफर’
कोरबा जिले के छोटे से गांव केराकछार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचना आसान नहीं था। श्रमिक परिवार में जन्मी 23 वर्षीय संजू ने गरीबी और अभावों के बीच अपने जुनून को जिंदा रखा। बिलासपुर की बहतराई आवासीय बालिका कबड्डी अकादमी में प्रशिक्षण लेते हुए उन्होंने अपने खेल को उस स्तर तक पहुंचाया, जहां से वापसी का कोई रास्ता नहीं था—सिर्फ जीत ही उनका लक्ष्य बन गया।


सरकार ने दिया सबसे बड़ा सम्मान
समारोह में उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में राज्य में खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि संजू की उपलब्धियां न केवल राज्य बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात हैं और यह अन्य खिलाड़ियों, खासकर बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगी।


हर मुकाबले में ‘निर्णायक वार’, ऐसे मिली टीम इंडिया में जगह
संजू का चयन भारतीय टीम में यूं ही नहीं हुआ। उन्होंने लगातार राष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट्स में दमदार प्रदर्शन किया—कोलकाता, भटिंडा, विशाखापट्टनम, तमिलनाडु और नागपुर जैसे शहरों में खेले गए मुकाबलों में उन्होंने अपनी पहचान बनाई। इसके बाद इंडिया कैंप में शानदार प्रदर्शन के दम पर उन्हें पहले एशियन चैंपियनशिप और फिर वर्ल्ड कप टीम में जगह मिली।


संघर्ष, जुनून और मानसिक मजबूती की मिसाल
संजू देवी की कहानी सिर्फ जीत की नहीं, बल्कि संघर्ष और मानसिक मजबूती की भी है। उनका मानना है कि बड़े स्तर पर सफलता पाने के लिए सबसे जरूरी है मानसिक रूप से मजबूत होना। कठिनाइयों के बीच पहला कदम पार करना ही असली चुनौती होती है—और वही आपको आगे बढ़ने की ताकत देता है।