एक महीने से बूंद-बूंद को तरस रहे लोग, सड़कों पर उतरे हजारों नागरिक—जोन ऑफिस घेराव के बाद चेतावनी ने बढ़ाई हलचल

स्वतंत्र बोल
रायपुर, 18 अप्रैल 2026:
  राजधानी रायपुर में पानी की किल्लत अब एक गंभीर संकट का रूप ले चुकी है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। इसी बढ़ती परेशानी और गुस्से के बीच कांग्रेस नेताओं के साथ बड़ी संख्या में नगरवासियों ने आज जोन कार्यालय का घेराव कर दिया। प्रदर्शन के दौरान लोगों का आक्रोश साफ नजर आया—और चेतावनी भी उतनी ही सख्त थी।


सूखे नल, बढ़ता गुस्सा… हालात बेकाबू होने की कगार पर
कापा, नहरपार, डबरीपार, गणेशनगर और चंडीनगर जैसे इलाकों में पिछले एक महीने से पानी की सप्लाई पूरी तरह ठप पड़ी है। लोगों का कहना है कि नगर निगम की ओर से टैंकर भी नियमित नहीं भेजे जा रहे, जिससे संकट और गहरा गया है।

सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं को उठानी पड़ रही है। कई महिलाएं रोजाना दूर-दूर से पानी ढोने को मजबूर हैं, जबकि कई बार पीने का पानी भी मुश्किल से मिल पा रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि रोजमर्रा की जिंदगी तक प्रभावित हो रही है।


जोन कार्यालय घेराव से मची हलचल
जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष श्रीकुमार मेनन के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि अब सिर्फ आश्वासन नहीं, ठोस समाधान चाहिए।


3 दिन का अल्टीमेटम… वरना ‘बड़ा विस्फोट’ तय
प्रदर्शन के दौरान श्रीकुमार मेनन ने नगर निगम को सीधे-सीधे 3 दिन का अल्टीमेटम दे दिया। उन्होंने कहा कि जोन क्रमांक 9 में एक महीने से पाइपलाइन से पानी नहीं आ रहा और सिर्फ चार टैंकरों से काम नहीं चल सकता।

उन्होंने मांग रखी कि कम से कम 10 टैंकरों की व्यवस्था की जाए और जल्द से जल्द पाइपलाइन के जरिए पानी की सप्लाई बहाल की जाए। चेतावनी भी साफ थी—अगर तीन दिन में हालात नहीं सुधरे, तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।


“पूरा शहर जूझ रहा है” – नेताओं का आरोप
कांग्रेस नेता पंकज शर्मा ने कहा कि रायपुर के अधिकांश वार्ड पानी की समस्या से जूझ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम इस गंभीर समस्या को लेकर लापरवाही बरत रहा है। उनका कहना है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।


निगम का दावा—राहत की कोशिश जारी
वहीं, जोन कमिश्नर राकेश शर्मा ने कहा कि समस्या को गंभीरता से लिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिन इलाकों में पानी की किल्लत है, वहां टैंकरों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि लोगों को कुछ राहत मिल सके।