स्वतंत्र बोल
कबीरधाम07 मई 2026: वनांचल की पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच बसे लोखान के कमराखोल गांव में “सुशासन तिहार” के दौरान एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने सरकारी योजनाओं को सिर्फ आंकड़ों से निकालकर लोगों की जिंदगी से जोड़ दिया।
गांव के बीच एक विशाल आम के पेड़ की छांव में जब मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai अचानक ग्रामीणों के बीच पहुंचे, तो वहां माहौल औपचारिक नहीं बल्कि भावनात्मक हो गया। महिलाएं अपने संघर्ष, मेहनत और बदलाव की कहानियां खुलकर साझा करने लगीं।
इसी चौपाल में मुख्यमंत्री ने स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की सराहना करते हुए कहा कि अब समय “लखपति दीदी” तक रुकने का नहीं है—अब सोच “करोड़पति दीदी” बनने की होनी चाहिए।
उनके इस बयान ने वहां मौजूद महिलाओं में नई ऊर्जा और आत्मविश्वास भर दिया।
कार्यक्रम में ग्राम कुकदूर की कचरा तेलगाम ने अपनी सफलता की कहानी साझा की, जिन्होंने बिहान योजना से मिले ऋण के सहारे शटरिंग व्यवसाय शुरू किया। आज वे न केवल आत्मनिर्भर हैं, बल्कि सालाना लाखों रुपये की आय भी अर्जित कर रही हैं और कई निर्माण कार्यों से जुड़ी हुई हैं।
उन्होंने बताया कि पहले उनकी जिंदगी घर की चारदीवारी तक सीमित थी, लेकिन अब वे परिवार की आर्थिक रीढ़ बन चुकी हैं।
सरकारी आंकड़ों से आगे बढ़कर यह कहानी बताती है कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई ताकत बन रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य सिर्फ योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि दूरस्थ क्षेत्रों की महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर सम्मान के साथ आगे बढ़ें।
अब इस बदलाव की कहानी गांव-गांव में फैल रही है—
जहां “लखपति दीदी” का सपना अब धीरे-धीरे “करोड़पति दीदी” बनने की उम्मीद में बदल रहा है।


