स्वतंत्र बोल
रायपुर 13 अप्रैल 2026. महिला बाल विकास विभाग में साड़ी सप्लाई में हुए भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी को लेकर बवाल मचा हुआ है। विभागीय मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने जाँच के बाद कार्यवाही का निर्देश दिया है, तो जिलों से छोटी और गुणवत्ताहीन साड़ियो को वापस मंगाया जा रहा है। बताते है सबसे पहले शिकायत बिलासपुर जिले की आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओ ने साडी को लेकर नाराजगी जताया, कलेक्टर से शिकायत भी की। जिसके बाद धीरे धीरे प्रदेश के अन्य जिलों के कार्यकर्ताओ ने साड़ी के गुणवत्ता पर सवाल उठाने लगे, चौतरफा फजीहत होने पर विभाग ने संज्ञान लिया।
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मैनेजमेंट की कमी-
विभाग द्वारा प्रत्येक वर्ष आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओ और सहायिकाओं को साडी दिया जाता है, जिसके लिए शासन स्तर पर प्रति साड़ी 500 रुपये निर्धारित है। पर्चेज रूल के चलते विभाग स्वयं खरीदी ना कर खादी ग्रामोद्योग के माध्यम से खरीदी की जाती है और यही खेल यही होता है। साड़ी खरीदी में दो विभाग शामिल हो जाते है, महिला बाल विकास और ग्रामोद्योग विभाग जिसके बाद गुणवत्ताहीन में कमी आना स्वाभाविक है। विभागीय अफसर साड़ी खरीदने की बजाये कार्यकर्ताओ स्वयं साडी खरीदने का आदेश जारी कर भुगतान करते तो इस फजीहत से बचा जा सकता था, पर इससे कमीशनखोरी की गुंजाइस नहीं होती। इस पुरे मामले को सही तरीके से हैंडल किया जा सकता था, पर मंत्री राजवाड़े और उनकी टीम सही तरीके से हैंडल करने में नाकाम रही। उधर विभाग में काम व संविदा ना मिलने से नाराज लोगो ने जमकर भुनाया।
इस साल भी खरीद रहे साडी-
विभाग द्वारा साल 2025-2026 में करोडो रुपये की साडी खरीदने ग्रामोद्योग विभाग के माध्यम से कार्यादेश जारी हुआ है। साड़ियों की सप्लाई शुरू होने के पहले ही साड़ी पर विवाद उठने के बाद जिम्मेदारों के कान खड़े हो गए है। बताते है इस बार सप्लाई का ठेका जिस संस्था को दिया गया है, उसके प्रमुख आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो की जाँच का सामना कर रहा है। ग्रामोद्योग के चैयरमेन ने भी साड़ी की सप्लाई में इंट्रेस्ट लिया है।
