साड़ी खरीदी में खेला: वित्तीय वर्ष समाप्ति के छह दिन पहले वर्कऑर्डर, कमीशनखोरो ने मंत्री के निर्देशों को दिखाया ठेंगा।

स्वतंत्र बोल
​रायपुर 12 अप्रैल 2026.  घोटाले और भ्र्ष्टाचार में डूबे महिला बाल विकास विभाग के अधिकारियो ने विभाग में काम करने वाली लाखो महिलाओ के सम्मान से खिलवाड़ कर दिया। वे महिलाये जो वर्षो से विभागीय काम को जमीनी स्तर पर पहुंचाने में जुटी रहती है, उनको दी जाने वाली साड़ी में भी जिम्मेदारों ने कमीशनखोरी कर दी। विभागीय जानकारी अनुसार प्रदेश के आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओ और सहायिकाओं को दो- दो नग साड़ी देने का प्रावधान है, प्रत्येक वर्ष विभाग द्वारा साडी ग्रामोद्योग विभाग के माध्यम से महिलाओं को दी जाती है।

साल 2024-25 में 1 लाख 94 हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओ और सहायिकाओं के लिए 500 रुपये प्रति साडी की दर पर खरीदी की गई थी। कार्यदेशानुसार लंबाई 6.3 मीटर, जिसमे 5.5 मीटर साडी और 80 सेंटीमीटर ब्लॉउज के लिए था। इसका कार्यादेश 25 मार्च 2025 को जारी किया था। इसके लिए विभाग ने करीब 9 करोड़ 7 लाख रुपये का भुगतान प्रस्तावित है। विभागीय अधिकारियो ने ग्रामोद्योग विभाग को कार्यादेश दिया और वही गड़बड़ी हो गई। दरअसल पूरा खेल कमीशन का है, विभागीय अधिकारियो ने ग्रामोद्योग विभाग को कार्यादेश दिया और आयोग ने सप्लायर कंपनी को इस बीच हिस्सेदारी ने साड़ी की नाप छोटी कर दी। साड़ी सप्लाई का जिम्मा किसी शुभम अग्रवाल की फर्म को दिया गया था।

 

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आनन् फानन में कार्यादेश-
साडी में कमीशनखोरी के बाद उपजे विवाद में सामने आया कि इसका कार्यादेश वित्तीय 2024-2025 की समाप्ति के छह दिन पहले 25 मार्च 2025 को आनन फानन में दिया गया था। तब तत्कालीन में आईसीडीएस सेक्शन के प्रभारी उपसंचालक सुनील शर्मा थे, जो दो महीने बाद सेवानिवृत हो गए। करोडो रुपये की खरीदी में डंडी जिम्मेदारों के द्वारा मारी गई.. बताते है इसमें 35 प्रतिशत का खेल किया गया है।

संचालक ने वापस मंगाई साड़ी-
साडी खरीदी में भ्रष्टाचार और विवादों के बाद विभागीय अधिकारियो की जाँच टीम ने जाँच किया। बिलासपुर के साथ कुछेक जिलों में शिकायते सही पाई गई, ऐसे में संचालक रेणुका श्रीवास्तव ने सभी जिला कार्यक्रम अधिकारियो को आदेशित कर साडीयो की जाँच के साथ गुणवत्ताहीन और छोटी साड़ियों को वापस मंगाया है। उसे बदलकर दोबारा कार्यकर्ताओ को दिया जायेगा।

मंत्री के निर्देश को ठेंगा-
महिला बाल विकास में कमीशनखोरी वर्षो से जारी है, विभागीय मंत्री बदल जाते है पर सप्लायर और ठेकेदार वही होते है। अधिकारियो ने भी कमीशनखोरी को काम का हिस्सा बना लिया है। कुछ दिन पहले मंत्री ने बैठक लेकर एक -एक रुपये महिलाओ और बच्चो के लिए उपयोग करने और भ्रष्टाचार की शिकायतों पर कड़ी कार्यवाही का निर्देश दिया था पर खटराल किस्म के अधिकारीयो पर ऐसे निर्देशों का कोई असर नहीं होता। पूर्ववर्ती कांग्रेस की सरकार से ढाई वर्षो बाद भी संचालनालय और मंत्रालय में कुंडली मारकर बैठे अधिकारियो से इससे ज्यादा उम्मीद नहीं की जा सकती।

मंत्री राजवाड़े की चेतावनी- एक-एक रुपया महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए..भ्रष्टाचार हुआ तो खैर नहीं।