स्वतंत्र बोल
रायपुर 31 मार्च 2026. महिला बाल विकास विभाग में जो हो जाये कम ही माना जाता है। विभाग में एक जिला बाल विकास अधिकारी ने साढ़े 11 लाख रुपये का गबन किया, विभागीय अधिकारियो ने पुलिस में अपराध भी दर्ज कराया, लेकिन कार्यवाही की जगह उसे दोषमुक्त कर दिया। विभाग में खाने खिलाने का रिवाज वर्षो से चल रहा, मंत्री कोई भी बने भ्रष्ट अधिकारी उन्हें साध ही लेते है। अब इस मामले की शिकायत पीएमओ को भेजा गया है।
शिकायतों के अनुसार मामला साल 2006 से 2009 के बीच का है जब अधिकारी बिलासपुर संभाग के जिले में पदस्थ थी, साढ़े 12 लाख रुपये पूरक पोषण आहार (रेडी टू इट) का, जो स्वसहायता समूह की महिलाओ को देना था, उसे खुद डकार गई। शिकायते जिले से निकलकर संचालनालय पहुंची तो एक तीन सदस्यीय जाँच टीम बनाई गई, जिसने गंभीरता पूर्वक जाँच कर पाया कि 9,11,933 रुपये डकार गए। जाँच समिति के रिपोर्ट पर संबंधित जिले में अधिकार और सहायक के खिलाफ अपराध भी कराया गया। अब सिस्टम ऐसा कि 2008 में घटित भ्रष्टचार पर साल 2018 में गैर जमानती धाराओं में अपराध दर्ज कराया गया, पर आज दिनांक तक पुलिस चालान पेश नहीं कर पाई है। उसके बाद तुर्रा ऐसा कि साल 2023 में चुनाव के दौरान तत्कालीन संचालक ने मेहरबानी दिखाते हुए अपराध को माफ़ कर दिया। आदेश में लिखा गया कि
“अधिकारी द्वारा गबन किया गया, चारो आरोप प्रमाणित पाए गए लेकिन चूँकि अधिकारी अनुसूचित जनजाति वर्ग से ताल्लुक रखते है और साल 2003 में अनुसचित जाति/जनजाति के कर्मचारियों के साथ भेदभाव नहीं किये जाने के सम्बन्ध में वर्णित आदेश और अधिकारी द्वारा प्रस्तुत अभ्यावेदन अनुसार भविष्य में ऐसी त्रुटि नहीं करने सचेत करते हुए विभागीय जाँच प्रकरण को समाप्त कर नस्तीबद्ध किया जाता है।” और लाखो के गबन घोटाले की फाइल दिसंबर 2023 में बंद कर दी गई।


