स्वतंत्र बोल
रायपुर 08 अप्रैल 2026. भिलाई के यस बैंक के हुए 165 करोड़ के हवालाकाण्ड में कांग्रेस सरकार में ताकतवर रहे लोग शामिल रहे। उन लोगो की शह पर ही अनिमेष सिंह के नाम पर खोले गए बैंक खाते में अरबो रुपयों का ट्रांजेक्शन हुआ है, और मामला बिगड़ने पर केस पुलिस तक जा पहुंचा। कांग्रेस की सरकार में सत्ताधारी पार्टी के नेताओ के दबाव में छत्तीसगढ़ पुलिस ने जाँच के नाम पर केवल खानापूर्ति की। स्थिति ऐसी रही अनिमेष सिंह की शिकायत पर दर्ज अपराध को पुलिस खात्मा करने में जुटी रही। साल 2020 में दर्ज हुए एफआईआर में पुलिस ने हितेश चौबे और उनके सहयोगियों का नाम सार्वजनिक होने से बचाने एफआईआर 20/2020 को सीसीटीएनएस पोर्टल में केस सेंसटिव बताकर छिपा दिया ताकि कोई दूसरा व्यक्ति अनिमेष की शिकायतों को ना देख सके, जबकि हितेश चौबे की शिकायत पर दर्ज एफआईआर 24/2020 को सार्वजानिक रखा। अनीमेष ने अपनी शिकायत में एक होटल और कट्टे का उल्लेख किया है। इस हवालाकांड दुर्ग के यस बैंक प्रबंधन के साथ तत्कालीन आईजी और एसपी में उतने ही शामिल है जिन्होंने रसूखदार अपराधियों को बचाने पूरा जी जान लगा दिया था, और हाईकोर्ट में गलत हलफनामा देते रहे।
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करोडो रुपये का ट्रांजेक्शन, काले रंग की कार और मर्सिडीज-
स्वतंत्र बोल की पड़ताल में सामने आया कि अरबो रुपये के हवालकांड के पैसो से करीब आधा दर्जन काले रंग की गाड़ियां खरीदी गई थी, जिसका नंबर एक ही सीरीज का था। भिलाई और दुर्ग की सडको पर दौड़ती इन कारो का ऐसा आतंक था कि बड़े बड़े दूर रहते थे। 58 लाख रुपये खरीदी गई मर्सिडीज चमचमाते भिलाई की सड़को पर निकलती थी। एफआईआर होने के बाद सभी गाड़ियां गायब हो गई है, भिलाई के लोग बताते है कि कारो को कही छिपाकर रखा गया है। अब सीबीआई की जाँच में स्पष्ट हो जाएगा कि शोरूम से निकली गाड़ियों का भुगतान किसने किया और किसके नाम पर आरटीओ में रजिस्ट्रेशन हुआ था।
सीबीआई में दो एफआईआर-
शुक्रवार को इस मामले की सुनवाई हाईकोर्ट बिलासपुर में हुई जिसमे सीबीआई के वकील ने कोर्ट को बताया कि भिलाई के खुर्सीपार थाने में दर्ज दो एफआईआर 20/2020 और 24/2020 को आगे जाँच में लेकर अलग अलग धाराओं में दो एफआईआर दर्ज किया है जिसका नंबर है RC1242026A0002 और RC1242026A0003 है, दोनों ही एफआईआर में गैर जमानती धाराएं है। कोर्ट ने सीबीआई के वकील को केस स्टेटस के साथ दो महीने बाद 15 जून बुलाया है।
