स्वतंत्र बोल
रायपुर 14 फरवरी 2025. प्रदेश के जिला सहकारी केंद्रीय और अपैक्स बैंको में भर्राशाही जारी है। भर्राशाही पर अंकुश लगाने में विभाग नाकाम है, अधिकारियो की मनमानी और स्वेक्षाचारिता पर अंकुश नहीं लगने से सहकारिता प्रेमियों ने विभागीय मंत्री पर सवाल उठा रहे है।
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दरअसल प्रदेश के जिला सहकारी बैंको में बीते छह महीनो में 50 से अधिक कर्मचारी गबन और घोटाले के आरोप में बर्खास्त और सस्पेंड हो चुके है, अधिकांश बैंको में करीब 100 से अधिक कर्मचारियों की जांच जारी है, उसके बाद भी गड़बड़ी और उदंडता पर अंकुश नहीं लग पा रहा है। कार्यवाही प्राधिकृत अधिकारियो ने की है, अपैक्स बैंक के अधिकारियो ने तो करोडो के घोटाले के बाद भी आँखे मूंद रखी है। बरमकेला में 50 करोड़ से अधिक के गबन करने आरोपितों पर चार महीने बाद भी अपराध दर्ज नहीं हुआ है। इसके पीछे की वजह जानने स्वतंत्र बोल ने सहकारिता विभाग के सीनियर और रिटायर अधिकारियो से बात की तो पता चला कि अपैक्स बैंक के एमडी का इसमें अहम् भूमिका सामने आया है। अपैक्स बैंक में एमडी सहकारिता विभाग के अधिकारियो को प्रतिनियुक्ति पर बनाया जाता है। मौजूदा एमडी कमलनारायण कांडे को पूर्व की कांग्रेस सरकार में एमडी अपॉइंट किया गया था, सत्ता परिवर्तन के साल भर बाद भी बदलाव नहीं किया गया। जिसके चलते बैंको में बड़ी गड़बड़ियां सामने आ रही है।
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एमडी केएन कांडे को अक्टूबर 2024 में मंत्री का ओएसडी अपॉइंट किया गया, सहकारिता में ऐसा पहली बार हुआ कि एक ही व्यक्ति को दो महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई। हद तो तब हो गई जब कांडे के अपर पंजीयक प्रमोट होने के बाद भी नहीं हटाया गया और यथावत रखा गया। कमलनारायण कांडे जनवरी 2025 में अपर पंजीयक प्रमोट हुए और अगले साल उनका रिटायरमेंट है।
बैंको चंदा वसूली !
सहकारिता विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार प्रदेश के सभी जिला सहकारी बैंको के सीईओ को टारगेट दिया गया है, जिसके बाद बैंको के सीईओ धड़ल्ले से विभागीय मंत्री के नाम पर सहकारी समितियों से 1 से डेढ़ लाख रुपये का चंदा ले रहे है। जिससे सहकारी समितियों में नाराजगी उभर रही है। बताते है कि मकर संक्रांति के पहले अपैक्स बैंक मुख्यालय में सभी सीईओ की बैठक में ये टास्क दिया गया था। जिसके बाद ही विवादित अधिकारी सुरेंद्र कुमार जोशी को रिटायरमेंट ईयर में जिला सहकारी बैंक दुर्ग में पोस्टिंग दी गई। जोशी की दुर्ग में चौथी बार पोस्टिग हुई है, और वे नियुक्त आदेश जेब में लेकर बैंक पहुंचे थे।
दागीयो को प्रभार, केडर अफसर बे-गार-
जिला सहकारी बैंको में एक अभियान के तहत दागी अफसरों को सीईओ अपॉइंट किया गया है। जबकि बैंको में सीईओ केडर अधिकारियो को बनाने के आदेश है। दुर्ग में सीईओ रहे श्रीकांत चंद्राकर को महज सात महीने में हटाकर मुख्यालय अटैच कर दिया गया और उसकी जगह जोशी को सीईओ अपॉइंट किया गया। जिला सहकारी बैंक बिलासपुर और रायगढ़ में एलडीबी के अधिकारी को सीईओ का चार्ज दिया गया है,, रायगढ़ और जगदलपुर में भी वही स्थिति है। जबकि दो सीईओ साल भर पहले सस्पेंड हुए थे। जाँच में क्लीन चिट मिलने के बाद भी उन्हें बहाल नहीं किया गया है।
मंत्री जी ध्यान दीजिये-

सहकारिता विभाग की स्थिति सुधारने केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित भाई शाह ने पूरा जोर लगा दिया है। उसके बाद ही प्रदेश में अब सहकारी समितियों की संख्या बढ़ रही है। सहकारिता कोअन्य प्रस्करणो से जोड़ने कवायद हो रही है, ऐसे में अधिकारी विभागीय मंत्री के नाम पर दुरुपयोग करे, तो मंत्री को ध्यान देना चाहिए। बताते है कि एक अनुसूचित जनजाति वर्ग के अधिकारी को छह महीने पहले एमडी बनाने पावर सेंटर से आदेश हुआ था, नोटशीट भी चली थी पर कही जाकर अटक गई। अब जनजाति वर्ग के मुख्यमंत्री और विभागीय मंत्री के शासन में एक जनजाति वर्ग के अधिकारी की नोटशीट आखिर क्यों रुक रही, सोचने वाली बात है।
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