डोंगरगढ़ परिक्रमा पथ परियोजना पर विवाद गहराया, किसानों ने उठाए भूमि खरीद पर सवाल

डोंगरगढ़ परिक्रमा पथ परियोजना के विरोध में प्रभावित किसान, निजी भूमि खरीद और परियोजना की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए।

स्वतंत्र बोल

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डोंगरगढ़ 13जून 2026। छत्तीसगढ़ की धर्मनगरी डोंगरगढ़ में प्रस्तावित 8 किलोमीटर लंबे परिक्रमा पथ परियोजना को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। परियोजना के लिए ग्राम छिरपानी के 11 किसानों

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की निजी भूमि खरीदने की प्रक्रिया शुरू होते ही प्रभावित किसानों ने इसका विरोध शुरू कर दिया है। किसानों का आरोप है कि जब पर्याप्त शासकीय एवं राजस्व भूमि उपलब्ध है, तब निजी

भूमि खरीदने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है।

कलेक्टर कार्यालय द्वारा जारी सार्वजनिक सूचना के अनुसार, परियोजना के लिए संबंधित भू-स्वामियों की भूमि क्रय करने का प्रस्ताव रखा गया है। हालांकि प्रभावित किसानों का दावा है कि उन्हें अब तक

परियोजना का विस्तृत नक्शा नहीं दिखाया गया है और न ही यह स्पष्ट किया गया है कि उनकी भूमि का कौन-सा हिस्सा अधिग्रहित या खरीदा जाएगा।

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किसानों ने आरोप लगाया है कि विभागीय अधिकारियों की बजाय कुछ निजी व्यक्ति एवं कथित भूमि कारोबारी उनसे संपर्क कर रहे हैं, जिससे पूरे मामले को लेकर संदेह पैदा हो रहा है।

उनका कहना है कि प्रशासन जिस परिक्रमा पथ को धार्मिक पर्यटन विकास की महत्वाकांक्षी योजना बता रहा है, उसके रूट और तकनीकी आधार अब तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

प्रभावित किसानों का कहना है कि मौजूदा मार्गों का उन्नयन कर तथा उपलब्ध सरकारी भूमि का उपयोग कर भी परियोजना को पूरा किया जा सकता है। ऐसे में निजी भूमि खरीद और करोड़ों

रुपये के मुआवजे की आवश्यकता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

प्रभावित किसान फ़हीम अख़्तर ने आशंका जताई है कि कहीं यह पूरी प्रक्रिया कुछ चुनिंदा लोगों को लाभ पहुंचाने अथवा भूमि के मूल्य में कृत्रिम वृद्धि करने के उद्देश्य से तो नहीं की जा रही।

हालांकि इन आरोपों की अभी तक किसी सक्षम प्राधिकरण द्वारा पुष्टि नहीं हुई है।

किसानों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि उनकी आपत्तियों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया और परियोजना से संबंधित दस्तावेज

सार्वजनिक नहीं किए गए, तो वे न्यायालय की शरण लेने को बाध्य होंगे।

विवाद के बीच एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी उठ रहा है कि जब सरकारी भूमि उपलब्ध होने का दावा किया जा रहा है, तब निजी भूमि खरीद पर इतना जोर क्यों दिया जा रहा है। किसानों का

मानना है कि जांच के माध्यम से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मार्ग चयन किन तकनीकी मानकों के आधार पर किया गया है और कहीं परियोजना की आड़ में किसी व्यक्ति या समूह को अनुचित

लाभ पहुंचाने का प्रयास तो नहीं हुआ।

फिलहाल प्रशासन की ओर से परियोजना के रूट चयन, निजी भूमि