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धर्म डेस्क 8 अक्टूबर 2026: पितृपक्ष में 8 अक्टूबर 2026, गुरुवार को त्रयोदशी तिथि का श्राद्ध किया जाएगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिन परिजनों का निधन किसी भी माह के शुक्ल पक्ष या कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को हुआ हो, उनके निमित्त इस दिन श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा है. त्रयोदशी श्राद्ध को तेरस श्राद्ध भी कहा जाता है, जबकि गुजरात में इसे ‘काकबली’ और ‘बालभोलनी तेरस’ के नाम से जाना जाता है.
किन पूर्वजों के लिए किया जाता है त्रयोदशी श्राद्ध?
शास्त्रों के अनुसार, पितृपक्ष में जिस तिथि पर पूर्वज का निधन हुआ हो, उसी तिथि पर उनके लिए श्राद्ध और तर्पण करने से कर्म पूरा माना जाता है. यदि किसी व्यक्ति को अपने मृत परिजन की मृत्यु तिथि मालूम है और वह त्रयोदशी है, तो इसी दिन उनका स्मरण कर श्राद्ध करना चाहिए. श्रद्धापूर्वक किए गए इस कर्म से पितरों को तृप्ति मिलती है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है.
नोट कर लें तर्पण के 3 सबसे शुभ मुहूर्त
8 अक्टूबर को त्रयोदशी श्राद्ध कर्म पूरा करने के लिए दिन में तीन विशेष मुहूर्त बताए गए हैं. शास्त्रों में श्राद्ध के लिए कुतुप, रौहिण और अपराह्न काल को सबसे उत्तम माना गया है:
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कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:45 बजे से दोपहर 12:32 बजे तक (अवधि: 47 मिनट)
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रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:32 बजे से दोपहर 1:19 बजे तक (अवधि: 47 मिनट)
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अपराह्न काल: दोपहर 1:19 बजे से दोपहर 3:39 बजे तक (अवधि: 2 घंटे 20 मिनट)
दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके ऐसे करें तर्पण
तर्पण करने के लिए सुबह स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनें और शांत मन से पूर्वजों का ध्यान करें. इसके बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें. एक पात्र में साफ जल लेकर उसमें काले तिल और कुशा मिलाएं. अब अपने पितरों का नाम और गोत्र बोलते हुए जल अर्पित करें. तर्पण के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मण भोजन कराएं और गाय, कुत्ते, कौवे तथा जरूरतमंदों को भोजन या अन्न का दान दें.
परिवार में सुख-शांति और समृद्धि की मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितरों का स्मरण करने और उनके निमित्त दान-पुण्य करने से परिजनों को मानसिक शांति मिलती है. माना जाता है कि पितृपक्ष में विधि-विधान से किया गया श्राद्ध और तर्पण परिवार के सदस्यों को पितृदोष से राहत दिलाता है और घर में सुख, शांति तथा समृद्धि बनाए रखने में सहायक होता है.


