कन्या पूजन में 9 बच्चियां न मिलें तो क्या करें? जानें नियम

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धर्म डेस्क 18 अक्टूबर 2026:
नवरात्रि में महाअष्टमी और महानवमी के दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। इस दौरान भक्त छोटी बच्चियों को देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों का प्रतीक मानकर उनकी पूजा करते हैं और उन्हें हलवा, पूड़ी, चना व खीर का प्रसाद खिलाते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कन्या पूजन से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। अगर आप भी नवरात्रि में कन्या पूजन करने जा रहे हैं, तो पूजा की विधि, भोजन की शुद्धता और दक्षिणा से जुड़ी इन परंपराओं को जान लें।

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कन्या पूजन में किन नियमों का ध्यान रखें?

1. कन्याओं की संख्या का रखें ध्यान

धार्मिक मान्यता के अनुसार, कन्या पूजन में नौ कन्याओं को देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों का प्रतीक माना जाता है। अगर नौ कन्याएं उपलब्ध न हों, तो तीन, पांच या सात कन्याओं के साथ भी पूजन करने की परंपरा है।

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2. बटुक भैरव को भी बुलाएं

कन्या पूजन में छोटी बच्चियों के साथ एक बालक को भी भोजन कराने की परंपरा है। उसे बटुक भैरव या लांगूरा कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि कन्या पूजन में बालक को शामिल करना शुभ होता है।

3. कन्याओं के पैर धोकर आसन पर बैठाएं

कन्याओं के घर पहुंचने पर सबसे पहले उनके पैर साफ पानी से धोएं। इसके बाद स्वच्छ कपड़े से पैर पोंछकर उन्हें साफ आसन पर बैठाएं।

4. तिलक लगाकर चुनरी ओढ़ाएं

पूजन के दौरान कन्याओं के पैरों में आलता लगाने की परंपरा है। इसके बाद रोली और अक्षत से तिलक करें। कन्याओं को लाल चुनरी ओढ़ा सकते हैं या उनके माथे पर बांध सकते हैं।

कन्या पूजन में कैसा भोजन बनाएं?

कन्याओं के लिए बनाया जाने वाला भोजन सात्विक और स्वच्छ होना चाहिए। धार्मिक परंपरा में सूजी का हलवा, काले चने और पूड़ी को प्रमुख प्रसाद माना जाता है। इसके अलावा खीर, आलू या छोले की सब्जी भी रख सकते हैं। भोजन में प्याज और लहसुन का इस्तेमाल न करने की परंपरा है।

कन्या पूजन से पहले देवी मां को तैयार किए गए भोजन का भोग लगाएं। इसके बाद कन्याओं को भोजन कराएं।

भोजन के बाद दक्षिणा और उपहार दें

भोजन कराने के बाद कन्याओं और बटुक को अपनी क्षमता के अनुसार दक्षिणा या उपहार देने की परंपरा है। इसके बाद कन्याओं के पैर छूकर आशीर्वाद लें और उन्हें सम्मानपूर्वक विदा करें। उन्हें अगले साल फिर आने का निमंत्रण भी दिया जा सकता है।

कन्या पूजन में स्वच्छता का रखें ध्यान

पूजा शुरू करने से पहले उस स्थान को अच्छी तरह साफ कर लें, जहां कन्याओं को बैठाना और भोजन कराना है। भोजन बनाने और परोसने में भी स्वच्छता का ध्यान रखें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कन्या पूजन में शुद्धता और श्रद्धा को विशेष महत्व दिया जाता है।