धर्म स्वतंत्रता कानून के खिलाफ याचिका पर सुनवाई, अब 3 हफ्ते बाद क्या होगा?

Bilaspur highcourt

स्वतंत्र बोल
बिलासपुर 7 अक्टूबर 2026:
भारतीय धर्म स्वतंत्रता अधिनियम और भारतीय धर्म स्वतंत्रता नियम 2026 को चुनौती देने वाली याचिका पर गुरुवार को हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच में सुनवाई हुई। याचिका पर सरकार को अंतरिम आवेदन का जवाब देने के लिए तीन हफ्ते का समय दिया गया है। अब मामले की अगली सुनवाई सरकार के जवाब के बाद होगी।

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वीएन प्रसाद राव व अन्य ने दायर की याचिका

यह याचिका वीएन. प्रसाद राव व अन्य की ओर से दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. एस. मुरलीधर ने वर्चुअल माध्यम से पैरवी की।

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सुनवाई के दौरान अधिवक्ता ने नए कानून के तहत धर्म परिवर्तन के लिए तय प्रक्रियाओं और सरकारी स्तर पर अनुमतियों का मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि धर्म परिवर्तन की इच्छा रखने वाले व्यक्ति को इसकी जानकारी प्रकाशित करनी होगी। इसके बाद विभिन्न विभागों और सरकारी अधिकारियों से प्रक्रिया पूरी करनी होगी। याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि इस पूरी प्रक्रिया में कम से कम 200 दिन लगने का प्रावधान है।

धर्म परिवर्तन कराने वाले के पंजीयन का भी मुद्दा

याचिकाकर्ताओं की ओर से धर्म परिवर्तन कराने वाले व्यक्ति के लिए भी सरकार के समक्ष पंजीयन अनिवार्य किए जाने का तर्क रखा गया। अधिवक्ता ने कानून के उन प्रावधानों का भी उल्लेख किया, जिनके कारण व्यक्ति की स्वैच्छिक इच्छा से धर्म परिवर्तन करने की स्थिति में भी कई परिस्थितियों में संबंधित व्यक्ति और धर्म परिवर्तन कराने वाले को कानून के तहत आरोपी बनाया जा सकता है।

अब सरकार को देना होगा जवाब

सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने सरकार को अंतरिम आवेदन पर जवाब प्रस्तुत करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया है। अब मामले में आगे की सुनवाई सरकार के जवाब के बाद होगी।