स्वतंत्र बोल
रायपुर 17 जून 2025. ठाकुर रामचंद्र स्वामी जैतूसाव मठ की जमीनों को ट्रस्टी ही बेच रहे है। राजधानी के आसपास दतरेंगा, भटगांव, भरेंगा, सेजबहार और धरमपुरा के सैकड़ो एकड़ जमीनों को मठ से जुड़े रसूखदारों ने बेच दिया है। जिन ट्रस्टियो पर भगवन की सम्पत्ति बचाने की जिम्मेदारी है वे ही भगवान् की संपत्ति को लूटा रहे है। दतरेंगा की साढ़े 17 एकड़ जमीन छद्म किसान और बिल्डर अविनाशग्रुप के सिंघनिया को बेचने के बाद धरमपुरा की जमीन को बेचने का मामला सामने आया है, जिसमे ट्रस्टी अजय तिवारी पर मठ के साढ़े 5 एकड़ जमीन को कूटरचित दस्तावेज तैयार कर बेचने और फर्जीवाड़ा का आरोप है।
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दस्तावेजों के अनुसार अजय तिवारी ने धरमपुरा स्थित साढ़े 5 एकड़ जमीन को बेचने स्वयं को मठ के महंतो का चेला बताया। धर्मपुरा स्थित पटवारी हल्का क्रमांक 78 के खसरा क्रमांक 302/1 का टुकड़ा साढ़े पांच एकड़ जमीन को कई लोगो को बेच दिया गया, यह जमीन पूर्व में ठाकुर रामचंद्र स्वामी ट्रस्ट के सर्वराकार महंत लक्ष्मीनारायण दास के नाम पर था , साल 1971 में महंत लक्ष्मीनारायण दास ने अपने शिष्य गणेशदास को दें दिया था। साल 1976 में गणेशदास दे निधन के बाद उनका क़ानूनी उत्तरधिकारी नहीं होने के चलते जमीन महंत लक्ष्मीनारायण दास को वापस नामांतरित हो गई थी। साल 1987 में महंत लक्ष्मीनारायण दास के निधन के बाद उस जमीन को अजय तिवारी ने स्वयं को महंत गणेश दास का उत्तराधिकारी बताते हुए उक्त जमीन को साल 1989 में अपने नाम पर नामांतरित करा लिया गया।
जमीन एक, दर्जनों खरीददार-
अजय तिवारी ने उसी जमीन के 5 एकड़ को किसी राहुल जैन को बेचा, शेष 0.50 एकड़ जमीन को गड़बड़ी से बचने धर्मपुरा निवासी बुद्धिलाल को देकर उससे डेढ़ एकड़ जमीन ले लिया। दोनों के बीच रजिस्टी ना होकर आपसी लेन देन हुआ, श्री तिवारी ने आधा एकड़ जमीन देकर डेढ़ एकड़ जमीन हासिल कर लिया। बाद में उसे भी घृतमणि यादव, बोधिराम साहू सहित अन्य को बेच दिया। साल 2023 में मामला कलेक्टर तक पहुंचा तो जाँच के आदेश हुआ, अपर कलेक्टर ने जाँच में पाया कि नियमो का उल्लंघन कर फर्जीवाड़ा किया गया है, ऐसे में समस्त रजिस्ट्री शून्य की जाए।
