स्वतंत्र बोल
रायपुर 24 अप्रैल 2025. राजधानी के प्राचीन श्रीरामचंद्र स्वामी जैतूसाव मठ में महंत और ट्रस्टियो की नियुक्ति को लेकर विवाद रहा है। साल 2007 में तत्कालीन महंत रामभूषण दास की मृत्यु के बाद नए महंत की नियुक्ति होनी थी, बताते है कि उनके तेरहवी के दिन मठ में जमकर हंगामा हुआ। बताते है कि मठ में दो गुट बन गए थे, एक गुट में वरिष्ठ कांग्रेस नेता सत्यनारायण शर्मा, महेंद्र अग्रवाल, अजय तिवारी सुरेश शुक्ला सहित बाकी ट्रस्टी थे, तो दूसरे गुट में रामभूषण दास के भांजे आशीष तिवारी उर्फ़ महंत राम आशीष दास और भतीजे विकास तिवारी उर्फ़ रामविकास दास.. इसमें पहला गुट हावी रहा और दुग्धाधारी मठ के राजेश्री महंत रामसुंदर दास को महंत नियुक्त कर दिया। आशीष तिवारी और रामविकास दास ने स्वयं को महंत रामभूषण दास का उत्तराधिकारी बताया पर दूसरे गुट ने स्वीकार नहीं किया। बकौल आशीष तिवारी उनके पास रामभूषण दास का लिखा वसीयतनामा भी है।
|
WhatsApp Group
|
Join Now |
|
Facebook Page
|
Follow Now |
|
Twitter
|
Follow Us |
|
Youtube Channel
|
Subscribe Now |
ट्रस्टी नहीं, बन गए उपाध्यक्ष..
मठ शुरुआत से जन आस्था का केंद्र रहा, पर 1987 में महंत लक्ष्मी नारायण दास की मृत्यु के बाद के असामाजिक तत्व हावी होने लगे और विवाद गहराने लगा। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और तत्कालीन में मंदिर हसौद विधानसभा से विधायक से सत्यनारायण शर्मा का नाम ट्रस्टी बनाने प्रस्तावित हुआ पर पंजीयक सार्वजानिक पंजी में विधिवत रूप से उनका नाम नहीं जुड़ पाया। साल 2016 में उपाध्यक्ष जेएन ठाकुर की मृत्यु के बाद उन्हें उपाध्यक्ष बना दिया गया। मठ के महेंद्र अग्रवाल कहते है कि ‘श्री शर्मा का नाम जोड़ने ट्रस्टी कमेटी ने प्रस्ताव पारित कर पंजीयक सार्वजानिक न्यास को भेजा था, अब नाम क्यों नहीं जोड़ा गया,, वे ही बता पाएंगे।”
बिल्डर से कर लिया समझौता !

जैतूसाव मठ का ट्रस्ट प्रबंधन ट्रस्ट की सम्पत्ति को बचाने में नाकाम रहा है। ट्रस्ट की जमीनों पर बिल्डरों और भूमाफियाओ के फर्जी दस्तावेजों के सहारे कब्ज़ा कर लिया और मठ प्रबंधन अपने हक़ की लड़ाई नहीं लड़ सका। साल 2024 में ऐसे ही जमीन के मामले में ट्रस्ट प्रबंधन ने क़ानूनी लड़ाई लड़ने की बजाये समझौता कर लिया। दतरेंगा स्थित मठ की जमीन खसरा क्रमांक 277 और 283 पर एक किसान परिवार ने दावा किया कि उनके मृत पिता ने साढ़े 17 एकड़ जमीन साल 1972 में तत्कालीन महंत लक्ष्मीनारायणदास से खरीदा था, जिसका नामान्तरण नहीं हुआ है। कथित खरीदी बिक्री के 40 वर्षो बाद नामान्तरण आवेदन पर ट्रस्ट के महेंद्र अग्रवाल ने तहसीलदार कोर्ट, एसडीएम कोर्ट और राजस्व बोर्ड में आपत्ति की। महेंद्र अग्रवाल अनुसार जमीन कभी बेचीं नहीं गई और मामले में लगाए पेपर फर्जी है। उन्होंने सिविल कोर्ट में परिवाद भी दाखिल किया,, बाद में ऐसा कुछ हुआ कि कब्ज़ा छोड़ने के बहाने पैसा लेकर कथित किसान परिवार से ट्रस्ट प्रबंधन ने समझौता कर लिया।
ट्रस्ट प्रबंधन ने 14 अक्टूबर 2024 को ट्रस्ट प्रबंधन की बैठक मे प्रस्ताव पारित कर कोर्ट में लगाए परिवाद सहित सभी आपत्तियो को वापस लेने और बदले में कथित किसान परिवार से 62 लाख रुपये लेने का निर्णय लिया। बैठक वरिष्ठ कांग्रेस नेता सत्यनारायण शर्मा के निजी आवास आनदंम में हुआ था। इस तरह पैसे लेकर सभी आपत्तियों को वापस ले लिया गया। दतरेंगा की जमीन किसान के मार्फ़त अविनाश ग्रुप के सिंघानिया ने ख़रीदा है। जिसके बदले में उन्होंने ही चेक और कॅश में ट्रस्ट प्रबंधनको भुगतान किया है।
कृषि मंत्री नेताम ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस से की सौजन्य मुलाकात

