स्वतंत्र बोल
रायपुर 06 जुलाई 2026. बीजेपी कार्यालय एकात्म परिसर में डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी के 125वीं जन्म जयंती के उपलक्ष्य मे कार्यकर्ता सम्मेलन का आयोजन किया गया| जिलाध्यक्ष रमेश सिंह ठाकुर ने डॉ. मुखर्जी की जन्म जयंती को याद करते हुए श्रद्धा सुमन अर्पित किया और कहा कि डॉ. मुखर्जी जी ने देश की एकता और अखंडता को बनाए रखने के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर किया | जनसंघ की स्थापना से लेकर कश्मीर से धारा 370 हटाने को लेकर उन्होंने एक बड़ा जन आंदोलन खड़ा किया और वे बिना परमिट के कश्मीर मे दाखिल होने मे सफल भी हुए |
सम्मेलन मे मुख्य रूप से रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, प्रदेश उपाध्यक्ष नंदन जैन, संभाग सहप्रभारी डॉ. राजीव सिंह एवं रायपुर ग्रामीण के विधायक मोतीलाल साहू ने भी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी के जीवन पर प्रकाश डाला | कार्यकर्ता सम्मेलन के मुख्य वक्ता शिवरतन शर्मा ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन पर एवं उनके द्वारा किए गए कार्यों के बारे मे बताया। उन्होंने कहा की डॉ. मुखर्जी जनसंघ के संस्थापक थे और राष्ट्र की एकता और अखंडता बनाए रखने के लिए उन्होंने सकारात्मक विचार के साथ कार्य किया| 6 जुलाई 1901 मे जन्मे डॉ. मुखर्जी सारे सुविधाओ को छोड़कर देश कार्य मे जुट गये | उन्होंने कहा की डॉ. मुखर्जी बंगाली भाषा मे MA किया| 1929 मे विधान परिसद के सदस्य निर्वाचित हुए पश्चात कॉंग्रेस से स्तीफा देकर पुनः निर्दलीय निर्वाचित हुये| डॉ. मुखर्जी सबसे कम उम्र मे बंगाल यूनिवर्सिटी के कुलपति बने वे बहुत लंबे समय तक हिन्दू महासभा के अध्यक्ष भी रहे| वे हमेशा संयुक्त बंगाल न बने इसके लिए खिलाफत करते रहे जिसके कारण बंगाल आज भारत का हिस्सा है |
शिवरतन शर्मा ने बताया कि, देश की सबसे प्रथम उद्योग नीति लाने वाले उद्योग मंत्री के रूप मे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी थे | देश विभाजन के समय कुल 562 रियासते हुआ करती थी, मात्र 3 को छोड़कर सभी का विलय भारत मे हुआ हैदराबाद और जूनागढ़ रियासते भी सरदार पटेल के नेतृत्व मे विलय हुआ ,, लेकिन कश्मीर को लेकर नेहरू जी का एतिहासिक भूल का भूकतान पूरे देश को झेलना पड़ा उन्होंने कश्मीर की बागडोर राजा हरि सिंग को हटाकर शेख अब्दुल्ला को सौंप दी | यह नेहरू जी की सबसे भूल साबित हुई जहां दो विधान, दो निशान, दो प्रधान कश्मीर मे लागू किया गया जिसका पुरजोर विरोध जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने किया | नेहरू लियाकत समझौते पर उन्होंने अपनी असहमति दर्ज करते हुए नेहरू मंत्रीमंडल से 6 अप्रैल 1950 को त्याग पत्र दे दिया और उसके पश्चात 21 अक्टूबर 1950 को भारतीय जनसंघ की स्थापना की | जिसमे उनके साथ पं. दीनदयाल उपाध्याय, नाना जी देशमुख, सुंदर सिंह भंडारी, यज्ञ दत्त शर्मा, इन सभी संघ के पूर्ण कालिक कार्यकर्ताओं के साथ जनसंघ के कार्य मे जुड़ गये | डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी संसद मे नेताप्रतिपक्ष बने | कश्मीर से धारा 370, 35A हटे इसके लिए वहीं के प्रजा परिषद पार्टी के डोगरा जी ने एक बड़ा जनआंदोलन किया जिसका भारतीय जनसंघ ने पूर्ण समर्थन किया | बिना परमिट के कश्मीर मे प्रवेश करने को लेकर वहाँ की सरकार ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को बंदी बना लिया तत्पश्चात उनकी संदेहास्पत तरीके से मृत्यु की खबर आई| जिसे लेकर उनकी माता जी ने भारत सरकार से पोस्टमार्टम करवाने की मांग की जिसे नेहरू जी ने ठुकरा दिया |
सन 1950 के भारतीय जनसंघ के घोषणा पत्र मे की गयी मांग जो धारा 370 और 35A कश्मीर से हटाने की बाद की गयी थी उसी को 2019 मे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री जी द्वारा पूर्ण की गयी |
कार्यकर्त्ता सम्मेलन मे मुख्य रूप से प्रदेश मंत्री जयंती पटेल, अमित साहू, संजय श्रीवास्तव, अमरजीत छाबड़ा, नंदकुमार साहू, वर्णिका शर्मा, डॉ. सलीम राज, प्रफुल्ल विश्वकर्मा, मिर्जा एजाज बेग, सीमा साहू, जिला महामंत्री गुंजन प्रजापति, जिला उपाध्यक्ष ललित जयसिंग, अकबर अली, नवीन शर्मा, जितेंद्र धुरंधर, तुषार चोपड़ा, अर्चना हुकरे, श्रद्धा मिश्रा, पन्ना दुबे, रोहित द्विवेदी, विशाल भूरा, रोहित भारद्वाज, अखिलेश कश्यप, ओमप्रकाश साहू सहित बड़ी संख्या मे पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे|



