स्वतंत्र बोल
रायपुर 29 जनवरी 2025. जिला सहकारी केंद्रीय बैंक रायपुर के विभिन्न ब्रांचो में वर्षो से बैंककर्मियों के द्वारा घोटाला किया जा रहा है। बैंक के खजाने को चूना लगाने वाले इन कर्मियों पर कई दौर के जाँच पड़ताल के बाद ही प्रभावी कार्यवाही नहीं हुई, जिसका परिणाम है कि बैंक में गबन और घोटाले लगातार बढ़ते क्रम पर है। बैंक के सीओडी शाखा में साल 2016 से 2023 के बीच शाखा प्रबंधक और पूरी टीम ने मिलकर दस करोड़ से अधिक का गबन किया, साल 2023 में प्रारंभिक जाँच के बाद सितंबर 2023 में मौदहापारा पुलिस थाना में शाखा प्रबंधक सहित तीन लोगो पर गैर जमानती धाराओं में अपराध दर्ज कराया गया था।
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इस घोटाले में बैंक के 22 से अधिक कर्मचारी शामिल है, जिसकी पुष्टि बैंक प्रबंधन द्वारा गठित जाँच समिति की रिपोर्ट में हुआ है। उसके बाद भी बैंक प्रबंधन तीन के खिलाफ अपराध दर्ज कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। इस घोटाले में शामिल कर्मियों ने शपथ पत्र देकर गबन करना स्वीकार किया, उसके बाद भी प्रबंधन ने कार्यवाही नहीं कर पा रहा।
बैंक के चेस्ट ब्रांच घडी चौक के साथ गंज शाखा, वडगन शाखा, और अभनपुर शाखाओ में करोडो का गोलमाल अब भी जारी है। गंज और अभनपुर शाखा में गड़बड़ी करने वाले कर्मियों अब तक अपराध दर्ज नहीं हुआ है। दरअसल बैंक को सुनियोजित तरीके से लुटा गया है, और लूटने वालो को बैंक का सीईओ का हमेशा से सरंक्षण रहा है।
शपथ पत्र देकर घोटाला स्वीकारा-

सीओडी शाखा में घोटाला करने वालो में तीन शाखा प्रबंधक, कर्मचारी नेता मोहन सहित दो दर्जन से अधिक कर्मचारी शामिल है। गबन में शामिल पंकज सराफ और घनश्याम देवांगन ने शपथ पत्र देकर करोडो का घोटाला दिसंबर 2023 में स्वीकार किया था। पंकज सराफ ने अपने और अपनी माँ प्रमिला सराफ के खाते में करोडो रुपये ट्रांसफर किया था तो घनश्याम देवांगन ने अपने और अपनी रजनी देवांगन के साथ रामेश्वर बारले के बचत खाते में 1 करोड़ रुपये से अधिक् की राशि ट्रासंफर किया था। दोनों के शपथ पत्र के बाद भी ना तो उन्हें बर्खास्त किया गया ना ही दोनों पर अपराध दर्ज कराया गया।
घोटाला उजागर हुआ तो किया ट्रासंफर-

बैंक के गंज ब्रांच (खमतराई) में विजय वर्मा और शारदा शर्मा नामक बैंककर्मियों ने डेढ़ करोड़ से अधिक का गबन किया। उनके आईडी से पैसे ट्रांसफर हुआ, दोनों पर अब तक एफआईआर नहीं हुआ है। घोटाले उजागर होने पर गंज ब्रांच से सीओडी ट्रांसफर कर शोकाज नोटिस दिया और कार्यवाही नहीं की। शारदा शर्मा अब भी नौकरी कर रही तो विजय वर्मा फरार है। बैंको में सरकारी खजाने को चूना लगाने वालो पर नकेल कसने की जिम्मेदारी सीईओ और प्राधिकृत अधिकारी की है। बैंक सूत्रों के अनुसार सीईओ और घोटालेबाजो के बीच किसी समझौते की चर्चा है, जिसके चलते ही कार्यवाही को टाला जा रहा है। बैंक की सीईओ अपेक्षा व्यास ने जिला सहकारी बैंक दुर्ग में सीईओ रहते सरकारी खजाने को डाका डालने वालो को फ्री हैंड दिया था ।
मीडिया पर दबाव बनाने कोशिश-

बैंक जानकारों के अनुसार बैंक में घोटालेबाजो का एक गिरोह वर्षो से काम कर रहा है। स्थापना, निर्माण, रिकवरी सेक्शन में वर्षो से जमे लोगो ने बैंक को क्षति पहुंचाने में कसार नहीं छोड़ा है। मीडिया द्वारा बैंक में व्याप्त गड़बड़ियों को उजागर करने पर ही बैंक प्रबंधन द्वारा गड़बड़ियों को रोकने की बजाये मीडिया को रोकने प्रयास किया जाता है,बैंक के इतिहास में पहली बार हेड ऑफिस में बंदूकधारी गार्ड की तैनाती की गई है। कुछ महीनो पहले एक इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकार के साथ बैंक परिसर में सीईओ के गुंडों ने घेराबंदी की कोशिश भी किया था। उधर एक बड़ा सवाल है कि बैंक में हुए घोटाले के पेपर्स किसने सार्वजनिक किया ? इस मामले पर सीईओ श्रीमती अपेक्षा व्यास से जानकारी लेने उन्हें फ़ोन और मैसेज किया पर नो रिप्लाई रहा।

