स्वतंत्र बोल
रायपुर 21 फरवरी 2025 जिला सहकारी बैंको में जारी भर्राशाही पर प्रभावी कार्यवाही नहीं होने और सहकारी समितियों से मंत्री के नाम पर वसूली करने वाले अपैक्स बैंक एमडी और सीईओ से संगठन नाराज है। बताते है कि सहकारिता में खुलेआम वसूली सहकारिता मंत्री के नाम पर की जा रही है, प्रदेश के सभी सहकारी समितियों में बीजेपी नेताओ द्वारा कार्यकर्ताओ को प्राधिकृत अधिकारी मनोनीत किया गया है। ऐसे में वसूली की शिकायत संगठन तक पहुंची है। संगठन की नाराजगी के बाद मंत्री घोटालेबाजो पर कार्यवाही कर सकते है।
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दरअसल प्रदेश के पांचो जिला सहकारी बैंको के सीईओ को धान खरीदी के दौरान प्रत्येक सहकारी समिति से 1 लाख रुपये का टारगेट दिया गया था, जिसके लिए अब समिति प्रबंधको पर दबाव बनाया जा रहा है। ऐसे में समितियों के प्राधिकृत अधिकारियो ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया है, उधर समिति प्रबंधको पर दबाव बन रहा है।
तो क्या यही शर्त थी ?
सहकारिता विभाग में जारी भर्राशाही और जिला सहकारी बैंको में चल रहे गबन घोटाले पर कार्यवाही की धीमी गति का एक बड़ा सिस्टम है। कई घोटालो में दोषी सिद्ध होने के बाद भी सुरेंद्र जोशी को सीईओ बनाकर खेला किया जा रहा तो दर्जनों शिकायतों के बाद भी अपेक्षा व्यास को राजधानी के जिला सहकारी बैंक का सीईओ बनाकर उपकृत किया गया है। दरअसल जोशी और अपेक्षा व्यास में एक समानता है कि दोनों पर आर्थिक अनियमितता के गंभीर शिकायते है और दोनों ही दुर्ग से ताल्लुख रखते है। उधर अपैक्स बैंक के एमडी से मिले फ्री हैंड के बाद सीईओ खुले हाथो से धर्नार्जन में जुटे है। अंदरूनी सूत्रों के अनुसार मकर संक्रांति के पहले अपैक्स बैंक में हुई बैठक में जब सभी सीईओ को टारगेट दिया गया तो एक महिला सीईओ ने आगे बढ़कर डेढ़ लाख प्रति सहकारी समिति वसूली कर देने का दावा किया है। जिसके बाद समझना कठिन नहीं होगा कि सीईओ के नाम पर बैंको में कलेक्शन एजेंट अपैक्स बैंक एमडी द्वारा बिठाया गया है।
सहकारिता में दागियों को पोस्टिंग, मंत्री के नाम पर खेला.. लूट को अघोषित छूट क्यों ?
