सहकारिता से समृद्धि कैसे: छह महीने में सैकड़ो बैंककर्मियों हुए सस्पेंड, बैंको में गड़बड़ियों रोकने कोई पॉलिसी नहीं.. एमडी को दोहरा चार्ज

स्वतंत्र बोल
रायपुर 26 फरवरी 2025.  प्रदेश के जिला सहकारी बैंको में बैंककर्मियों के द्वारा ही करोडो का गबन कर बैंक को चूना लगाया जा रहा है, जिला सहकारी बैंक दुर्ग, बिलासपुर, अंबिकापुर में बीते छह महीने में सौ से अधिक बैंक कर्मियों को सस्पेंड और बर्खास्त किया गया है। एक तरफ सरकार साल 2025 को अंतरास्ट्रीय सहकारिता वर्ष के रूप में मना रही है तो दूसरी तरफ बैंको में बढ़ते गबन और घोटालो ने सहकारिता विभाग की पोल खोल दी है। सरकार ने सहकारिता को आम लोगो से जोड़ने साल 2029 तक प्रत्येक गाँवो में एक सहकारी समिति खोलने का लक्ष्य रखा है, जिसकी शुरुआत में अगले एक महीने में 500 गाँवो में 500 नई सहकारी समिति खोला जाएगा। दूसरी तरफ सहकारी समितियों और बैंको में व्याप्त गड़बड़ियों के रोकथाम के लिए कोई भी कारगार प्रयास नहीं हो रहा है। सहकारी समितियों में करोडो के धान गायब हो रहे, बैंको में बैंक कर्मचारी ही खजाने को लूट रहे, इन पर रोक लगाने सरकार ने कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया है, तो क्या इस दिशा में सहकारिता के जिम्मेदारों को सोचना नहीं चाहिए ?

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बैंककर्मी ही बैंक को लूट रहे-

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सहकार से सरोकार और किसानो को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से खोले गए जिला सहकारी बैंक और सहकारी समितियान लूट के अघोषित अड्डे बन गए है, जहाँ खुलेआम बैंककर्मी ही डाका डाल रहे है। दरअसल पिछली सरकारों ने कोई योजना नहीं बनाई गंभीरता दिखाया, उसी नक़्शे कदम पर मौजूदा सहकारिता मंत्री भी चल रहे है। उनके नाम पर प्रदेश के सहकारी समितियों से बैंक के सीईओ वसूली कर रहे, और अब तक इस पर अंकुश नहीं लगाया गया है। धड़ल्ले से मंत्री केदार कश्यप का नाम लेकर सीईओ द्वारा सहकारी समितियों से वसूली की जा रही है।

सहकारिता से समृद्धि कैसे ?

प्रदेश में 2058 सहकारी समितियां वर्तमान में कार्यरत है, जो धान खरीदी और खाद बीज वितरण का काम करती है। सरकार का उद्देश्य से सहकारिता से समृद्धि लाना है ऐसे में इन समितियों को हाईटेक किया जा रहा है। अब किसानो के नक़्शे खसरे ऑनलाइन समितियां देख सकेंगी और मैनुअल ने होने वाले खेल से निजात मिलेगा। उधर प्रत्येक समितियों से हो रही 1 से डेढ़ लाख की वसूली की भरपाई सहकारी समितियां किस मद से करेगी ? यह बड़ा सवाल है। सहकारिता में पदस्थ अधिकारियो के अनुसार धान खरीदी केन्द्रो में हो रहे गोलमाल इस टारगेट वसूली का परिणाम हो सकती है। उधर सहकारी समिति प्रबंधको को टारगेट वसूली पूरा नहीं करने पर उन्हें सस्पेंड करने या जाँच की धमकी दी जा रही है।

एमडी को दोहरा चार्ज

अपैक्स बैंक के प्रबंध संचालक के पास फिलहाल दोहरा चार्ज है। उन्हें अक्टूबर 2024 में मंत्री का ओएसडी बनाया गया है, जबकि उनके अपैक्स बैंक से हटने की चर्चाये थी। ऐसे में आखिर ऐसी क्या परिस्थिति निर्मित हुई कि उन्हें हटाने के बजाये दोहरा चार्ज दिया गया ? बैंक के विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार मंत्री का ओएसडी बनने के बाद ही बैंको के सीईओ को प्रत्येक सहकारी समितियों से टारगेट दिया गया है।

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