स्वतंत्र बोल
रायपुर 26 फरवरी 2025. पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में अजब गजब माहौल है। यहाँ के कभी बिना प्रश्न पत्र छपे परीक्षा आयोजित कर दी जाती है तो बार से मिठाई खरीदी जाती है। विश्वविद्यालय में अराजकता इतनी बढ़ गई है कि कार्यपरिषद की बैठक में सदस्यों को देख लेने की धमकी भी दी जाने लगी है। एक दिन पहले यानी 25 फरवरी को विश्वविद्यालय में कार्यपरिषद का बैठक आयोजित था।
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बैंठक कुलपति डॉ सच्चिदानंद शुक्ला की अध्यक्षयता में आयोजित थी, जिसमे अधिकांश सदस्य मौजूद थे। बैठक में एक सदस्य ने प्रभारी कुलसचिव शैलेन्द्र पटेल के कुलसचिव लिखने पर सदस्यों ने आपत्ति की और जानकारी मांगा। तो उन्हें सही जानकारी से अवगत कराना था पर ऐसा नहीं हुआ, उल्टे सवाल पूछने वाले सदस्य को बाहर देख लेने की धमकी दी गई। जिसके बाद विश्वविद्यालय में व्याप्त अराजकता की स्थिति को समझा जा सकता है। कार्यपरिषद में विधायक, सामाजिक क्षेत्र प्रतिष्ठित नागरिक, राज्यपाल के प्रतिनिधि, उच्च शिक्षा सचिव के प्रतिनिधि सहित, विश्वविद्यालय के सदस्य शामिल होते है। 25 फरवरी की बैठक में शामिल लोगो की जानकारी अभी सार्वजानिक नहीं हुई है।
वीसी वर्मा ने सौपा था प्रभार-
रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में शैलेंद्र कुमार पटेल मूलपद उपकुलसचिव है। 25 मई 2022 को तत्कालीन कुलसचिव गिरीशकांत पांडेय को हटाने के बाद व्यवस्था बनाने तत्कालीन कुलपति डॉ केसरीलाल वर्मा ने पटेल को कुलसचिव का प्रभार दिया था,,ताकि कार्यालयीन व्यवस्था बनी रहे। उसके बाद से अब तक उच्च शिक्षा विभाग ने विश्वविद्यालय में स्थाई/रेगुलर कुलसचिव की नियुक्ति नहीं की है। उसके बाद भी शैलेंद्र कुमार पटेल ने प्रभारी कुलसचिव की जगह स्वयं को कुलसचिव बताया जा रहा है। सरकारी दस्तावेजों,नोटशीट और नेमप्लेट में भी स्वयं को कुलसचिव दिखाया जा रहा है, जो नियमतः गलत है। दरअसल साल 2023 तक के कार्यपरिषद की बैठकों में शैलेन्द्र पटेल को प्रभारी कुलसचिव बताया जाता था, फिर अचानक पटेल ने स्वयं से कुलसचिव बताना शुरू कर दिया। इसी बात को लेकर कार्यपरिषद की बैठक में सदस्य ने आपत्ती की, ऐसे में कुलपति डॉ सचिदानंद शुक्ला को बतौर अध्यक्ष वस्तु स्थिति स्पष्ट करना था, पर कुलपति ने ऐसा नहीं किया।
क्या प्रभारी लिखने में शर्म आ रही ?
पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय सबसे बुरे दौर से गुजर रहा है। बीते डेढ़ साल में अनेको ऐसे मामले आये जिससे विश्वविद्यालय प्रबंधन को शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है। शिक्षाविदों के अनुसार शासन स्तर पर नियुक्ति आदेश जारी नहीं होने पर संबंधित अधिकारी को सरकारी दस्तावेजों में प्रभारी लिखना चाहिए, पर शैलेन्द्र पटेल ऐसा नहीं कर रहे। शैलेन्द्र पटेल ने इससे पहले एबीवीपी के पदाधिकारी को जेल भेजने की धमकी दिया था।
रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के प्रभारी कुलसचिव की पीएचडी, एमफिल की डिग्री फर्जी…!




