स्वतंत्र बोल
रायपुर 25 अप्रैल 2025. भारत माला परियोजना में हुए मुआवजा घोटाले में ईओडब्ल्यू ने जांच तेज कर दी है। ईओडब्ल्यू ने 23 अप्रैल को अपराध दर्ज कर विवेचना में लिया जिसके शुक्रवार तड़के घोटाले में शामिल संदेहियों के घरो, दुकानों और दफ्तरों में छापेमारी की। ईओडब्ल्यू ने प्रदेश के रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर और महासमुंद के 20 जगहों में छापेमारी की। जिसमे अधिकारियो को थोक में महत्वपूर्ण दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, बैंक खातों की जानकारी, निवेश से संबंधित दस्तावेज और मोबाइल फ़ोन जब्त किया है।
इनके यहाँ छापा-
ईओडब्ल्यू ने अभनपुर के तत्कालीन एसडीएम रहे निर्भय साहू(निलंबित) तहसीलदार रहे लखेश्वर प्रसाद किरण, शशिकांत कुर्रे, पटवारी दिनेश पटेल, योगेश देवांगन, जीतेन्द्र साहू, रोशन वर्मा, सहित जमीन दलालो हरमीत खनूजा, विजय जैन, उमा तिवारी, अभनपुर निवासी ह्रदय गिलहरे और कारोबारी विनय गाँधी के यहाँ छापेमारी की। भारत माला परियोजना घोटाले में राजस्व अधिकारियो ने जमीं दलालों के मिलकर सरकारी खजाने को जमकर चूना लगाया है। अधिकारियो और दलालो के संगठित गिरोह ने करीब 700 करोड़ रुपये का घोटाला किया है। उमा तिवारी वही महिला है जिसने जैतूसाव मठ को फर्जी तरीके से आहरण किया है। इस पूरे घोटाले का मास्टर माइंड हरमीत खनूजा को बताया जा रहा है। विश्सवनीय सूत्रों के अनुसार ईओडब्ल्यू ने हरमीत खनूजा को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है।
बजट सत्र में इस घोटाले की गूंज से सत्ता पक्षसहित राजस्व विभाग के अधिकारी हिल गए थे। 12 मार्च को मंत्री परिषद् की बैठक में घोटाले की जाँच ईओडब्ल्यू से कराने का निर्णय लिया गया था। राजस्व विभाग के जिम्मेदरो ने ईओडब्ल्यू को पूरी रिपोर्ट उपलब्ध कराने में डेढ़ महीने लगा दिया। ईओडब्ल्यू को रिपोर्ट मिलने के बाद 23 अप्रैल को अपराध दर्ज किया गया।
इस घोटाले की आंच रायपुर के तत्कालीन कलेक्टर डॉ सर्वेश्वर भूरे तक पहुंच सकती है। ग्रामीणों और पीड़ितों की सैकड़ो शिकायतों के बाद भी डॉ भूरे ने गड़बड़ियों पर आँखे बंद कर रखा था, और जाँच रिपोर्ट को महीनो तक दबाये रखा।



