स्वतंत्र बोल
रायपुर 02 फरवरी 2025. सहकारिता विभाग में कमाऊ पूतो को फ्री हैंड है। जिला सहकारी बैंको में सीईओ की नियुक्ति और पोस्टिंग को देखकर तो यही लग रहा है। प्रदेश के जिला सहकारी बैंक रायपुर और दुर्ग में जिस तरह सीईओ को पोस्टिंग की गई है, उसके बाद सहकारिता विभाग की स्थिति सार्वजानिक हो गई है। जिला सहकारी बैंक दुर्ग में सुरेंद्र कुमार जोशी को दर्जनों शिकायतों और जाँच के बाद भी आनन फानन में सीईओ अपॉइंट करना और राजधानी में अपेक्षा व्यास के खिलाफ कर्मचारियों और बीजेपी विधायकों द्वारा पत्र लिखने के बाद भी नहीं हटाना.. ये बताने पर्याप्त है कि सिस्टम सुधारने का दावा करने वाले सिर्फ बातो तक सिमित है। एक तरफ केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह प्रदेश की सहकारिता को गुजरात मॉडल जैसा साधन संपन्न बनाने जुटे है पर खटराल किस्म के अधिकारियो ने “वसूली मॉडल” लागू कर रखा है।
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जिला सहकारी बैंक रायपुर की सीईओ अपेक्षा व्यास के खिलाफ दुर्ग के बीजेपी नेता ललित चंद्राकर, गजेंद्र यादव, प्रितपाल बेलचंदन सहित दर्जन भर सहकारी समिति के सदस्यों ने करीब 17 शिकायते सहकारिता विभाग को दस्तावेजी प्रमाणों के साथ भेजा है।तो छह महीने पहले सत्ता पक्ष के विधायक मोतीलाल साहू और पुरंदर मिश्रा ने पत्र लिखकर कार्यवाही करने कहा था, उन पत्रों पर कार्यवाही क्या हुई किसी को नहीं पता, उल्टे अवैध वसूली की रफ़्तार दोगुनी हो गई है। बताते है कि सीईओ ने जिला सहकारी बैंक रायपुर अंतर्गत के सभी सहकारी समितियों को टारगेट दे रखा है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार सीईओ ने सभी पैक्स को 1 से डेढ़ लाख का टारगेट दे रखा है। डिसीसीबी रायपुर अंतर्गत 550 सहकारी समितियां है, बताते है कि पिछले गुरुवार को हुई नोडल अधिकारियो की बैठक में सभी को वन टू वन समझा दिया गया है।
उधर रिटायरमेंट साल में हिट विकेट होकर दोबारा पिच पर जमे जिला सहकारी बैंक दुर्ग के सीईओ सुरेंद्र जोशी ने भी धड़ल्ले से बैंटिंग करना शुरू कर दिया है। सभी बैंक प्रबंधको को बैठक लेकर काम समझा दिया गया है, जोशी भी अपेक्षा की राह पर है। बैंकिंग सूत्रों के अनुसार जोशी ने भी जिला सहकारी बैंक दुर्ग अंतर्गत सभी सहकारी समितियों और शाखा प्रबंधको को टारगेट दिया है।
सरकार की छवि धूमिल हो रही-

खटराल किस्म के अधिकारियो के चलते सहकारिता विभाग और सरकार की छवि धूमिल हो रही है। वसूली पसंद अधिकारियो को फ्री हैंड होने से सहकारिता विभाग में एक बड़ा घोटाला सामने आ सकता है। खुलेआम चल रही टारगेट वसूली का असर सरकार की छवि पर हो रहा है ऐसे में आरसीएस और एसीएस साहू को ध्यान देना चाहिए।


