जगदलपुर। बस्तर में खरीफ सीजन की गतिविधियां तेज हो गई हैं। खेतों में धान बोआई का काम शुरू हो चुका है और किसान मानसून के आगमन से
पहले खेती की तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून के 15 से 18 जून के बीच बस्तर पहुंचने की संभावना है।
जिले के कई इलाकों में किसानों ने बोआई का प्रारंभिक कार्य पूरा कर लिया है, जबकि गभार खेतों में धान बीज डालने का काम जारी है। हालांकि मौसम की अनिश्चितता
किसानों की चिंता बढ़ा रही है। तेज धूप और बीच-बीच में हो रही हल्की बारिश के कारण बीजों के खराब होने का खतरा बना हुआ है।
इस वर्ष सामान्य से कम बारिश की आशंका के चलते किसान कम अवधि में तैयार होने वाली धान किस्मों को प्राथमिकता दे रहे हैं। वहीं कई किसान पारंपरिक देशी धान
की खेती की ओर भी लौट रहे हैं, जिससे रासायनिक खाद पर निर्भरता कम हो सके।
कृषि विभाग ने जिले में इस वर्ष 1 लाख 15 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में धान उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके साथ ही मिलेट मिशन के तहत कोदो, कुटकी
और रागी जैसी मोटे अनाज वाली फसलों का रकबा बढ़ाने की भी योजना बनाई गई है।
फिलहाल खेतों में किसानों की मेहनत शुरू हो चुकी है, लेकिन अच्छी पैदावार की उम्मीद अब समय पर और पर्याप्त मानसूनी बारिश पर टिकी हुई है।



