स्वतंत्र बोल
रायपुर 09 अप्रैल 2026: छत्तीसगढ़ की सियासत और कानून व्यवस्था से जुड़े एक चर्चित मामले में अचानक बड़ा मोड़ आ गया है। लंबे समय से विवादों में घिरे जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के अध्यक्ष अमित बघेल को हाईकोर्ट से राहत जरूर मिली है, लेकिन इसके साथ ऐसी शर्त भी जुड़ी है, जिसने पूरे मामले को और ज्यादा चर्चा में ला दिया है।
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छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने सुनवाई के बाद अमित बघेल को 3 माह की अंतरिम जमानत प्रदान की है। हालांकि, अदालत ने साफ तौर पर निर्देश दिया है कि इस अवधि के दौरान वे रायपुर जिले की सीमा में निवास नहीं करेंगे। केवल अदालत में पेशी के लिए ही उन्हें जिले में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी।
यह मामला उस घटना से जुड़ा है, जिसने प्रदेशभर में तनाव पैदा कर दिया था। 26 अक्टूबर 2025 को VIP चौक स्थित छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा के साथ तोड़फोड़ की घटना सामने आई थी। इस घटना के बाद हालात तेजी से बिगड़े और विरोध-प्रदर्शन के दौरान बवाल की स्थिति बन गई।
बताया जाता है कि घटना के अगले दिन अमित बघेल मौके पर पहुंचे, जहां उनके समर्थकों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई। हालात इतने बिगड़े कि पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। बाद में पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया, जो कथित रूप से नशे की हालत में था और मानसिक रूप से अस्वस्थ बताया गया।
लेकिन विवाद यहीं नहीं थमा। प्रदर्शन के दौरान अमित बघेल द्वारा कुछ समुदायों पर की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों ने आग में घी डालने का काम किया। इसके बाद प्रदेश ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में भी विरोध शुरू हो गया। रायपुर, रायगढ़ और सरगुजा सहित कई स्थानों पर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई।
इस पूरे मामले में कुल 14 एफआईआर दर्ज हुईं, जो तेलीबांधा, कोतवाली और देवेन्द्र नगर थानों में पंजीबद्ध हैं। अदालत में हुई सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह अंतरिम राहत दी गई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह जमानत आगे किसी बड़े फैसले की ओर संकेत है, या फिर आने वाले समय में यह मामला और ज्यादा उलझने वाला है। फिलहाल, जमानत के साथ लगी यह सख्त शर्त ही पूरे घटनाक्रम को रहस्यमयी बना रही है।
