25 रुपये प्रति टन की वसूली से 104 करोड़ तक कैसे पहुंची बात? EOW का दावा

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स्वतंत्र बोल
रायपुर 6 अक्टूबर 2026 :
छत्तीसगढ़ के कोल लेवी घोटाला मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने सोमवार, 5 अक्टूबर को कोर्ट में छठवां पूरक आरोप पत्र दाखिल किया। एजेंसी ने आरोप पत्र में दावा किया है कि कोयला परिवहनकर्ताओं से कथित तौर पर अवैध तरीके से वसूली गई 104 करोड़ रुपये की रकम कांग्रेस कार्यालय ‘राजीव भवन’ तक पहुंची। EOW के मुताबिक, उस समय छत्तीसगढ़ कांग्रेस के कोषाध्यक्ष और नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष रहे रामगोपाल अग्रवाल तक भी कथित तौर पर रकम का हिस्सा भेजा गया।

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EOW ने सूर्यकांत तिवारी को बताया मास्टरमाइंड

EOW के मुताबिक, जुलाई 2020 में खनिज विभाग की ई-परमिट प्रणाली में बदलाव किया गया था। इसके तहत जिला खनिज अधिकारी यानी DMO का मैन्युअल अप्रूवल अनिवार्य किया गया। एजेंसी के अनुसार इसके बाद बिना DO जारी हुए कोयला परिवहन बंद हो गया।

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आरोप पत्र के मुताबिक, इसी व्यवस्था की आड़ में 25 रुपये प्रति टन की दर से कथित अवैध कोयला लेवी की वसूली की गई। EOW ने सूर्यकांत तिवारी को इस मामले का मास्टरमाइंड बताया है। एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि इस कथित वसूली के लिए सीएम ऑफिस और वरिष्ठ अधिकारियों के नाम का दुरुपयोग किया गया।

फर्जी लोन और शेल कंपनियों के जरिए बैंक एंट्री का दावा

EOW के मुताबिक, कथित तौर पर अवैध तरीके से वसूली गई रकम को छिपाने के लिए रानू साहू के भाई पीयूष साहू, सौम्या चौरसिया के संबंधी अनुराग चौरसिया और कारोबारी सुनील कुमार अग्रवाल तथा जोगेंदर सिंह का सहारा लिया गया। जांच एजेंसी के मुताबिक, फर्जी लोन, राइस मिल और शेल कंपनियों के जरिए 10 करोड़ रुपये से ज्यादा की बैंक एंट्री कराई गई।

EOW ने दावा किया है कि कांग्रेस नेताओं ने इस राशि का इस्तेमाल चुनाव के लिए किया। यह दावा एजेंसी ने छठवें पूरक आरोप पत्र में किया है।