स्वतंत्र बोल
दुर्ग 03 जून 2026: दुर्ग जिला अस्पताल में हुई एक युवती की मौत अब बड़े विवाद का रूप ले चुकी है। आरोप है कि सिकलसेल बीमारी से जूझ रही युवती को समय पर ब्लड नहीं मिल सका, जिसके कारण उसकी जान चली गई। घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और मामला अब राजनीतिक गलियारों तक पहुंच गया है।
युवती की मौत के बाद कांग्रेस और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस जिला अध्यक्ष एवं पूर्व महापौर धीरज बाकलीवाल ने मृतका के परिजनों को उचित मुआवजा देने, पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
वहीं एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने जिला अस्पताल पहुंचकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। सिविल सर्जन के केबिन के बाहर नारेबाजी करते हुए कार्यकर्ताओं ने मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की। एबीवीपी पदाधिकारियों ने अपर कलेक्टर योगिता देवांगन और सीएमएचओ मनोज दानी की मौजूदगी में सिविल सर्जन डॉ. अशीशन मिंज से इस्तीफे की मांग भी उठाई।
जांच रिपोर्ट का इंतजार, कलेक्टर ने बनाई विशेष कमेटी
मामले के तूल पकड़ने के बाद कलेक्टर अभिजीत सिंह ने पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दे दिए हैं। जांच के लिए विशेष कमेटी गठित की गई है, जिसमें अपर कलेक्टर योगिता देवांगन और सीएमएचओ मनोज दानी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट मिलने के बाद दोषियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
परिजनों का गंभीर आरोप – ब्लड था या नहीं, यही सबसे बड़ा सवाल
जानकारी के अनुसार यह घटना 1 जून की है। सिकलसेल बीमारी से पीड़ित दीपिका को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों का कहना है कि डॉक्टरों ने ब्लड चढ़ाने की आवश्यकता बताई और उन्हें डोनर की व्यवस्था करने को कहा। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार डोनर नहीं खोज सका।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल के डॉक्टरों ने ब्लड की जरूरत बताई थी, लेकिन ब्लड बैंक विभाग ने ब्लड उपलब्ध कराने से इंकार कर दिया। उनका दावा है कि अगर समय रहते ब्लड मिल जाता तो दीपिका की जान बच सकती थी। इसी बीच इलाज के दौरान युवती की मौत हो गई।
अस्पताल की व्यवस्था पर उठे बड़े सवाल
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जिला अस्पताल में भर्ती एक गंभीर मरीज को समय पर ब्लड क्यों नहीं मिल सका। क्या अस्पताल में पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी या फिर कहीं प्रशासनिक लापरवाही हुई? इन सवालों के जवाब अब जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आ पाएंगे।
फिलहाल युवती की मौत ने पूरे जिले को झकझोर दिया है। परिजन न्याय की मांग कर रहे हैं, जबकि विपक्षी दल और छात्र संगठन दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर लगातार दबाव बना रहे हैं। अब सभी की निगाहें जांच कमेटी की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो इस मौत के पीछे की सच्चाई सामने ला सकती है।


