दवा घोटाले की STORY: ऐसे हुआ दवा निगम में करोडो का घोटाला, मोक्षित की मोनोपली, कमीशन के लालच में चुप रहे अधिकारी.. इनकी संलिप्तता

स्वतंत्र बोल
रायपुर 09 फरवरी 2025.  छत्तीसगगढ़ मेडिकल हेल्थ कॉर्पोरेशन (सीजीएमएससी) में करोडो के दवा सप्लाई घोटाले में रोज नए खुलासे हो रहे है। अधिकारियो ने सप्लायर कंपनियों से कमीशन लेकर उसे उपकृत किया, जिससे सरकार को करीब 700 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। ईओडब्लू में दर्ज एफआईआर के अनुसार अधिकारियो और सप्लाई कंपनी के मिलीभगत से सरकारी खजाने को 700 करोड़ से अधिक का चूना लगा। एफआईआर में लिखे एक-एक शब्द सीजीएमएससी में जारी घोटाले की पोल खोल रहे है।

छत्तीसगगढ़ मेडिकल हेल्थ कॉर्पोरेशन (सीजीएमएससी) की शुरुआत साल 2010 में तत्कालीन बीजेपी सरकार में किया गया था। शुरुआती दिनों में इसका संचालन ठीक ठाक तरीके से हुआ, फिर साल 2016 के बाद से धड़ल्ले से फर्जीवाड़ा और घोटाला चल रहा है। अधिकारियो ने मोठे कमीशन की लालच में आम लोगो की सेहत से खिलवाड़ करने वाले घटिया किस्म की दवाइयां और मेडिकल उपकरण की सप्लाई बाजार रेट से पांच से दस गुने कीमत पर की।

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दवा कारपोरेशन में दुर्ग की कंपनी मोक्षित कॉर्पोरेशन को साल 2016 में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री के सहयोग के बाद एंट्री मिली, जिसके बाद उसने एक तरफा कब्ज़ा कर लिया। एक तरीके से मोक्षित कॉर्पोरेशन छत्तीसगगढ़ मेडिकल हेल्थ कॉर्पोरेशन (सीजीएमएससी) को चलाने लगा। सप्लायर कम्पनी के अनुसार अधिकारियो और कमर्चारियों की पोस्टिंग होती गई, और मनमाने तरीके से घोटाले के खेल चलता रहा है। साल 2020 (कोविड) कोरोना संक्रमण काल में सप्लाई किये गए दवाइयों और उपकरणों में भारी भर्राशाही हुई।

अधिकारियो के साथ खेला-
कोरोना संक्रमणकाल में किये गए सप्लाई में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की गई। बिना बजट और स्वीकृति के 650 करोड़ का रीजेन्ट खरीदा गया। ईओडब्लू के एफआईआर अनुसार रीएजेन्ट की खरीदी मोक्षित कारपोरेशन के केमिकल को ख़राब होने से बचाने ख़रीदा गया, और 25 दिनों के भीतर सप्लाई ऑर्डर देकर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में डंप कर दिया गया। अधिकारियो के सह्य्पोग से 650 करोड़ का सप्लाई हुआ और भुगतान होने के पहले मामला सत्ता परिवर्तन होने से उलझ गया। सीएजी की ऑडिट में गड़बड़ी की पुष्टि हुई।

ऑडिट रिपोर्ट अनुसार साल 2016 से लेकर 2022 तक जमकर खेला हुआ। इन सात सालो में 3753.18 करोड़ रुपये का दवाई और मेडिकल उपकरण ख़रीदा गया जिसमे बड़ा भ्रष्टाचार हुआ। अधिकारियो के सरंक्षण में 5 रुपये के सामने को दो से ढाई हजार रुपये में खरीदा गया और हिस्सा सबमे बांटा। साल 2026 से लेकर 2024 तक छत्तीसगगढ़ मेडिकल हेल्थ कॉर्पोरेशन (सीजीएमएससी) के एमडी और स्वास्थ्य संचालक रहे आईएएस अधिकारियो के साथ सीजीएमएससी के महत्वपूर्ण पदों पर बैठे अधिकारियो ने खेला किया।

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साल 2026 से लेकर 2024 तक सीजीएमएससी के प्रबंध संचालक है-


आईएफएस व्ही रामाराव, आईएएस नरेंद्र सर्वेश भूरे, निरंजन दास, भुवनेश यादव, नीरज बंसोड़, सीआर प्रसन्ना,कार्तिकेय गोयल,अभिजीत सिंह, चंद्रकांत वर्मा और वर्तमान में पद्मनी भोई साहू है, तो स्वास्थ्य संचालक (डीएचएस) आईएएस आर प्रसन्ना, नरेंद्र कुमार शुक्ला, रानू साहू, दोबारा आर प्रसंन्ना, प्रियंका शुक्ल, शिखा राजपूत तिवारी, नीरज बंसोड़, भीम सिंह, जयप्रकाश मौर्या, ऋतुराज रघुवंशी और वर्तमान में डॉ प्रियंका शुक्ला है।
सबसे बड़ा खेला साल 2020 से लेकर 2022 में कोरोना संक्रमण काल में हुआ जिसमे स्वास्थ्य संचालक (डीएचएस) नीरज बंसोड़, भीम सिंह और जय प्रकाश मौर्य थे। इन्ही वर्षो में सीजीएमएससी के प्रबंध संचालक आईएएस सीआर प्रसन्ना, कार्तिकेय गोयल, अभिजीत सिंह, चंद्रकांत वर्मा और वर्तमान में पद्मनी भोई साहू है।

मोक्षित की मोनोपली-


सप्लायर कंपनी मोक्षित कारपोरेशन की सीजीएमएससी में मोनोपली रही। इसके संचालक ने आधा दर्जन सिस्टर कम्पनी बनाकर खेला किया है। साल 2016 से दिसंबर 2021 तक जीएम टेक्नीकल बसंत कौशिक रहे। कौशिक खाद्य औषधि प्रसाधन विभाग के एडीसी है, जो प्रतिनियुक्ति पर सीजीएमएससी में जीएम बनकर रहे। कोर्ट आदेशों के बाद उन्हें हटाकर उनके बैचमेट कमलकांत पाटनवार को प्रतिनियुक्ति पर सीजीएमएससी में दिसंबर 2021 में जीएम बनाया गया, तो फाइनेंस विभाग की अधिकारी मीनाक्षी गौतम विगत चार वर्षो से वित्त अधिकारी सीजीएमएससी रही। मीनाक्षी को सीजीएमएससी इतना भाया की ट्रांसफर होने पर दोबारा सीजीएमएससी लौट आई थी, अब मामला खुलने पर उन्हें हटाया गया है.. तो जीएम पाटनवार अभी भी जमे हुए है। इस तरह सरकारी खजाने को लूटने और मोक्षित को फायदा पहुंचाने में इन्ही अधिकारियो की भूमिका रही।

 

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