अमेरिकी मिडटर्म चुनाव: महंगाई और इमिग्रेशन पर वोटरों की नाराजगी, चुनाव में क्या असर दिखा?

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स्वतंत्र बोल
वाशिगंटन 4 नवंबर 2026:
अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को कई अहम सीटों पर नुकसान हुआ है। डेमोक्रेट्स ने सीनेट में बहुमत हासिल कर लिया है और प्रतिनिधि सभा में भी बढ़त बनाई है। चुनावी नतीजों के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अगर उनका नाम बैलेट पर होता तो रिपब्लिकन बड़ी जीत दर्ज करते। हालांकि, उन्होंने न्यूयॉर्क टाइम्स से बातचीत में नतीजे स्वीकार करने और डेमोक्रेट्स के साथ काम करने की बात भी कही।

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ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर लिखा कि वह बैलेट पर नहीं थे। अगर वह चुनाव लड़ रहे होते तो रिपब्लिकन पार्टी बड़े अंतर से जीतती। वहीं, अखबार से बातचीत में उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर काम करेगी और दोनों पक्ष कोई रास्ता निकालने की कोशिश करेंगे।

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सुहास सुब्रमण्यम और पिया डांडिया ने जीत दर्ज की

मिडटर्म चुनाव में भारतीय मूल के दो उम्मीदवारों ने भी जीत दर्ज की है। वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से डेमोक्रेट सुहास सुब्रमण्यम दोबारा चुनाव जीत गए हैं। वह अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में अपना दूसरा कार्यकाल शुरू करेंगे। सुब्रमण्यम पहले बराक ओबामा प्रशासन में सलाहकार के तौर पर काम कर चुके हैं। वहीं, फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से भारतीय मूल की पिया डांडिया ने रिपब्लिकन उम्मीदवार केसी असकार को हराया। डांडिया पहले शिक्षक और हाईस्कूल की प्रिंसिपल रह चुकी हैं। उनकी जीत के साथ वह अमेरिकी कांग्रेस की सदस्य बनेंगी।

महंगाई और स्वास्थ्य सेवा भी रहे चुनावी मुद्दे

अमेरिकी मतदाताओं ने इस चुनाव में महंगाई, स्वास्थ्य सेवा और दवाओं की बढ़ती कीमतों को अहम मुद्दा बताया। डेट्रॉइट में रहने वाली 34 वर्षीय डेटा एनालिस्ट ब्रिटानी हैमलिन ने रॉयटर्स को बताया कि उन्होंने बढ़ते खर्च, खासकर इलाज और दवाओं की कीमतों को ध्यान में रखकर वोट दिया।

शिकागो के एक सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाले 29 वर्षीय रयान ब्राउन ने ट्रंप प्रशासन की इमिग्रेशन नीति पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि इस नीति के कारण उनके कुछ छात्र स्कूल या काम पर जाने से डरने लगे थे। ब्राउन के मुताबिक, उनके एक छात्र को 48 घंटे से भी कम समय में मेक्सिको भेज दिया गया।

इमिग्रेशन और महंगा सामान भी बना चिंता का विषय

टेक्सास के फोर्ट वर्थ में मतदाताओं ने इमिग्रेशन को बड़ा मुद्दा बताया। 40 वर्षीय मारिया सेर्डा ने रॉयटर्स को बताया कि उनके कई सहकर्मियों को हिरासत में लिया गया और देश से बाहर भेज दिया गया। इससे वे अपने परिवारों से अलग हो गए। सेर्डा ने किराने के सामान और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों को भी लोगों पर बढ़ते आर्थिक बोझ की वजह बताया।