स्वतंत्र बोल
रायपुर, 01 अप्रैल 2026: अब जेल की ऊंची दीवारों के भीतर बंद कैदियों की दुनिया पूरी तरह बदलने वाली है। जो चेहरे अब तक सिर्फ यादों में थे, वे जल्द ही स्क्रीन पर नजर आएंगे। यह बदलाव न सिर्फ तकनीकी है, बल्कि हजारों कैदियों के जीवन और मानसिक स्थिति पर गहरा असर डाल सकता है।
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जेल बंदियों के मानवीय अधिकारों और सामाजिक पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए जेल प्रबंधन ने एक अहम पहल की है। सोमवार को जेल मुख्यालय और भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के बीच राज्य की सभी 33 जेलों में वीडियो और ऑडियो प्रिजन कॉलिंग सिस्टम स्थापित करने के लिए एमओयू साइन किया गया।
उप मुख्यमंत्री सह जेल मंत्री विजय शर्मा के निर्देश पर शुरू की गई इस व्यवस्था के तहत अब कैदी वीडियो कॉल के जरिए अपने परिजनों और अधिवक्ताओं से न केवल बात कर सकेंगे, बल्कि उन्हें देख भी पाएंगे। यह सुविधा अब तक सीमित रूप में ही उपलब्ध थी।
वर्तमान में प्रदेश की केवल 17 जेलों में ऑडियो कॉलिंग की सुविधा है, लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद सभी 33 जेलों में यह सुविधा उपलब्ध होगी। हालांकि, सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कैदी केवल पहले से निर्धारित नंबरों पर ही कॉल कर सकेंगे।
जेल मुख्यालय के अधिकारियों के अनुसार, लंबे समय तक परिवार से दूरी बंदियों के भीतर तनाव और अवसाद को बढ़ाती है। ऐसे में यह तकनीक उनके मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और उनके व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने में मददगार साबित हो सकती है।
प्रदेश की जेलों में फिलहाल 22 हजार से अधिक कैदी बंद हैं, जिन्हें इस सुविधा का सीधा लाभ मिलेगा। इसके लिए ऑडियो कॉल का शुल्क एक रुपये प्रति मिनट और वीडियो कॉल का शुल्क पांच रुपये प्रति मिनट तय किया गया है।
इस नई पहल को जेल सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जो कैदियों को समाज से जोड़ने और उन्हें एक बेहतर जीवन की ओर प्रेरित करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
