स्वतंत्र बोल
बेमेतरा 15 जून 2026: जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर स्वास्थ्य विभाग अब पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहा है। बढ़ती चुनौतियों के बीच प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि स्वास्थ्य योजनाओं का मूल्यांकन अब केवल कागजों पर नहीं, बल्कि जमीनी परिणामों के आधार पर होगा। मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए गए हैं और लापरवाही पर जवाबदेही तय करने की तैयारी भी शुरू हो गई है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में आयोजित मासिक समीक्षा बैठक के दौरान सीएमएचओ डॉ. रोहलेडर ने जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों को साफ संदेश दिया कि गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच, हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की पहचान और उनकी नियमित निगरानी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने शून्य होम डिलीवरी के लक्ष्य को गंभीरता से लेते हुए संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के निर्देश दिए।
बैठक में नियमित टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, वित्तीय प्रबंधन और ऑनलाइन स्वास्थ्य प्रबंधन प्रणालियों की विस्तार से समीक्षा की गई। अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि प्रत्येक गर्भवती महिला का जननी पोर्टल पर पंजीयन, बच्चों का यू-विन पोर्टल पर रिकॉर्ड और टीबी मरीजों की जानकारी निक्षय पोर्टल पर समयबद्ध तरीके से दर्ज की जाए।
हर मौत की होगी गहन जांच
सीएमएचओ ने मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए प्रत्येक मृत्यु प्रकरण की विस्तृत समीक्षा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि केवल आंकड़े जुटाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मौत के कारणों का विश्लेषण कर सुधारात्मक कदम उठाना भी जरूरी है। इसके साथ ही एसएनसीयू, एनबीएसयू और एचडीयू जैसी विशेष स्वास्थ्य इकाइयों की कार्यक्षमता बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया गया।
कई बड़े अभियानों की तैयारियों की समीक्षा
बैठक के दौरान सघन कुष्ठ खोज अभियान, पल्स पोलियो अभियान और टीबी मुक्त पंचायत अभियान की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को माइक्रोप्लानिंग मजबूत करने, फील्ड टीमों को प्रशिक्षित करने और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए।
डॉ. रोहलेडर ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग का उद्देश्य केवल मरीजों का इलाज करना नहीं, बल्कि जिले के हर नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। इसके लिए फील्ड विजिट बढ़ाने, रेफरल व्यवस्था को मजबूत करने और तकनीक आधारित निगरानी तंत्र को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।
स्वास्थ्य विभाग की इस सख्ती को जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा देने वाले कदम के रूप में देखा जा रहा है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि इन निर्देशों का असर जमीनी स्तर पर कितना दिखाई देता है।


