स्वतंत्र बोल
धमतरी 30 मई 2026: खरीफ सीजन की तैयारियों के बीच धमतरी प्रशासन किसानों को समय पर और उचित मूल्य पर उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है। कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के निर्देशन में कृषि विभाग और उर्वरक विक्रेताओं की संयुक्त बैठक आयोजित कर खाद भंडारण, वितरण और निगरानी व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए गए।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी गजेन्द्र ठाकुर की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में किसानों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए उर्वरक वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने पर जोर दिया गया।
किसानों को नहीं होगी खाद की किल्लत
बैठक में कृषि विभाग के अधिकारियों ने जिले के थोक और फुटकर उर्वरक विक्रेताओं को स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों को शासन द्वारा निर्धारित दरों पर ही उर्वरक उपलब्ध कराया जाए। अधिकारियों ने कहा कि खरीफ सीजन के दौरान खाद की उपलब्धता और वितरण पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
कालाबाजारी और जमाखोरी पर प्रशासन की कड़ी नजर
प्रशासन ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी, निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर बिक्री, अन्य वस्तुओं की अनिवार्य टैगिंग या वितरण में किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अधिकारियों ने बताया कि जिले में निरीक्षण दल और उड़नदस्ता टीम लगातार सक्रिय हैं और समय-समय पर दुकानों एवं गोदामों की जांच कर रही हैं। किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित विक्रेताओं के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
विक्रेताओं ने रखीं अपनी समस्याएं
बैठक के दौरान उर्वरक विक्रेताओं ने भी क्रय-विक्रय प्रक्रिया से जुड़ी विभिन्न व्यावहारिक समस्याओं और सुझावों को प्रशासन के सामने रखा। प्रशासन ने इन मुद्दों को गंभीरता से लेते हुए त्वरित संज्ञान लिया और आवश्यक विषयों पर शासन स्तर पर पत्राचार कर समाधान की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही।
किसान हित में पारदर्शी व्यवस्था की पहल
अधिकारियों का कहना है कि प्रशासन, कृषि विभाग और उर्वरक विक्रेताओं के बीच इस तरह का समन्वय किसानों के लिए बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करेगा। साथ ही इससे उर्वरक वितरण प्रणाली अधिक पारदर्शी, सुगम और किसान हितैषी बनेगी।
खरीफ सीजन के पहले प्रशासन की यह सक्रियता किसानों के लिए राहत भरी खबर मानी जा रही है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि सीजन के दौरान खाद की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होती है।


