राजधानी में ‘जहर का कारोबार’! Raipur में नकली दवाओं का बड़ा खेल बेनकाब, इंदौर से जुड़ा खतरनाक नेटवर्क उजागर

स्वतंत्र बोल
रायपुर 14 अप्रैल 2026:
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक ऐसा खुलासा हुआ है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यहां ड्रग विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में नकली दवाओं के एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ है, जो लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहा था।

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जांच में सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क इंदौर से संचालित हो रहा था, जहां से फर्जी दवाओं की सप्लाई राजधानी तक पहुंचाई जा रही थी। इन दवाओं को स्थानीय मेडिकल स्टोर्स के जरिए बाजार में खपाया जा रहा था, जिससे आम लोगों की सेहत पर गंभीर खतरा मंडरा रहा था।

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इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों—रोचक अग्रवाल, खेमराम बानी और सुरेंद्र कुमार—को गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान सारंगढ़ और भाटापारा के बीच भी इस नेटवर्क की कड़ियां जुड़ी मिली हैं, जिससे यह मामला और भी बड़ा होता नजर आ रहा है।

बताया जा रहा है कि इस रैकेट की परतें तब खुलनी शुरू हुईं, जब जनवरी में ट्रांसपोर्ट के दौरान नकली दवाओं की एक बड़ी खेप पकड़ी गई थी। उसी सुराग के आधार पर ड्रग विभाग ने दोबारा जांच शुरू की और धीरे-धीरे पूरे नेटवर्क का खुलासा हो गया।

इस केस में एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें दवा कारोबारियों की एक रेस्टोरेंट में गुप्त बैठक होती नजर आई। वीडियो के वायरल होते ही मामला और ज्यादा गरमा गया और अधिकारियों ने तेजी से कार्रवाई शुरू कर दी।

फिलहाल तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश कर 14 दिन की न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। लेकिन जांच एजेंसियों का मानना है कि यह सिर्फ शुरुआत है—इस नेटवर्क में कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है—आखिर कब तक लोगों की जिंदगी के साथ इस तरह का खिलवाड़ होता रहेगा? और क्या इस ‘जहर के कारोबार’ की जड़ तक पहुंचकर इसे पूरी तरह खत्म किया जा सकेगा?