‘आधी आबादी’ का पूरा हक अब दूर नहीं? Vishnu Deo Sai का बड़ा बयान—महिला आरक्षण से बदल जाएगी सत्ता की तस्वीर

स्वतंत्र बोल
रायपुर 14 अप्रैल 2026:
छत्तीसगढ़ की राजधानी Raipur से एक अहम सियासी संदेश सामने आया है, जिसने महिला सशक्तिकरण की दिशा में नई बहस छेड़ दी है। मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ के दौरान महिला आरक्षण को लेकर बड़ा बयान देते हुए इसे देश के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए ऐतिहासिक कदम बताया है।

नई दिल्ली के विज्ञान भवन से प्रसारित इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री Narendra Modi के उद्बोधन को सुनने के बाद सीएम साय ने कहा कि यह पहल देश की मातृशक्ति को निर्णय प्रक्रिया में सीधी भागीदारी देने की दिशा में निर्णायक साबित होगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि ‘पंचायत से पार्लियामेंट तक’ महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना नए भारत की पहचान बन रहा है।

सीएम साय ने 16 अप्रैल को संसद में होने वाली ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पर चर्चा को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह दिन महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है। उनके मुताबिक, जब महिलाएं नीति-निर्माण में शामिल होंगी, तभी ‘विकसित भारत’ की मजबूत नींव रखी जा सकेगी।

उन्होंने भारत की सांस्कृतिक परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि वैदिक काल से ही महिलाओं को समाज में उच्च स्थान दिया गया है और आज सरकार की योजनाएं इस परंपरा को आधुनिक रूप दे रही हैं। छत्तीसगढ़ में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए उठाए गए कदमों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि स्थानीय निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण से महिलाओं को नेतृत्व का मौका मिला है, जिसका सकारात्मक असर जमीनी स्तर पर दिख रहा है।

इसके साथ ही ‘महतारी वंदन योजना’ जैसी योजनाओं को महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक मजबूती का आधार बताते हुए सीएम साय ने कहा कि राज्य में ‘महतारी गौरव वर्ष’ मनाया जा रहा है, जो महिलाओं के सम्मान और भागीदारी का प्रतीक है।

उन्होंने प्रदेश की महिलाओं और संगठनों से आह्वान किया कि वे हर मंच पर अपनी आवाज बुलंद करें और इस बदलाव की यात्रा में सक्रिय भूमिका निभाएं। कार्यक्रम में स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, राज्यसभा सांसद लक्ष्मी वर्मा और विधायक पुरंदर मिश्रा सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।

अपने संबोधन के अंत में सीएम साय ने साफ कहा—जब नारी सशक्त होती है, तभी राष्ट्र सशक्त बनता है। अब सबकी नजर 16 अप्रैल पर टिकी है, जब संसद में होने वाली चर्चा यह तय कर सकती है कि देश की आधी आबादी को उनका पूरा हक कब और कैसे मिलेगा।