75% दिव्यांगता भी नहीं रोक सकी हौसला! एक ट्राइसाइकिल ने बदल दी जिंदगी, अब गांव-गांव बढ़ रहा कारोबार

स्वतंत्र बोल
रायपुर, 10 जून 2026: कभी रोजमर्रा के काम और रोजगार के लिए दूसरों पर निर्भर रहने को मजबूर रहे मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के ग्राम पद्दा टोला निवासी पुरोचन साहू की जिंदगी अब नई दिशा पकड़ चुकी है। 75 प्रतिशत दिव्यांगता के बावजूद संघर्ष का रास्ता चुनने वाले पुरोचन के लिए बैटरी चलित ट्राइसाइकिल केवल एक वाहन नहीं, बल्कि आत्मसम्मान, आत्मनिर्भरता और नए अवसरों की पहचान बन गई है।

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35 वर्षीय पुरोचन साहू अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए गर्मी के मौसम में गांव-गांव जाकर आइसक्रीम बेचते हैं, जबकि अन्य दिनों में ब्रेड बिक्री का काम करते हैं। शारीरिक चुनौतियों और सीमित संसाधनों के बीच लंबी दूरी तय करना उनके लिए बेहद मुश्किल था। कई बार वे उन बाजारों और गांवों तक नहीं पहुंच पाते थे, जहां बेहतर व्यापार और अधिक कमाई की संभावना होती थी।

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उनकी जिंदगी में बदलाव तब आया जब सुशासन तिहार 2026 के दौरान उनकी समस्या समाज कल्याण विभाग के संज्ञान में आई। इसके बाद उन्हें बैटरी चलित ट्राइसाइकिल उपलब्ध कराई गई। इस सहायता ने उनके जीवन की रफ्तार ही बदल दी।

अब पुरोचन बिना किसी की मदद के विभिन्न गांवों और बाजारों तक आसानी से पहुंच रहे हैं। इससे उनके कारोबार का दायरा बढ़ा है और आमदनी में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वे पहले की तुलना में अधिक ग्राहकों तक पहुंच पा रहे हैं और आत्मविश्वास के साथ अपना व्यवसाय संचालित कर रहे हैं।

पुरोचन साहू बताते हैं कि पहले एक जगह से दूसरी जगह जाने में काफी परेशानी होती थी। थकान और आवागमन की दिक्कत के कारण काम भी प्रभावित होता था। लेकिन बैटरी चलित ट्राइसाइकिल मिलने के बाद उनका जीवन काफी आसान हो गया है। अब वे पहले से ज्यादा कमाई कर रहे हैं और छोटी-छोटी जरूरतों के लिए किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता।

उनकी आंखों में अब भविष्य को लेकर नई उम्मीदें दिखाई देती हैं। जो रास्ते कभी मुश्किल और दूर नजर आते थे, आज वही उनके लिए रोजगार और अवसरों के नए द्वार बन चुके हैं। यह सहायता उन्हें केवल गतिशीलता ही नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर भी दे रही है।

पुरोचन साहू ने जिला प्रशासन, समाज कल्याण विभाग और सुशासन तिहार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की ऐसी पहलें दिव्यांगजनों के जीवन में वास्तविक परिवर्तन लाने का काम कर रही हैं। उनकी कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि समय पर मिली मदद और संवेदनशील प्रशासन किसी व्यक्ति की जिंदगी को पूरी तरह बदल सकता है।