स्वतंत्र बोल
रायगढ़/सक्ती,15 अप्रैल 2026: छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुआ भीषण बॉयलर ब्लास्ट अब एक ऐसी त्रासदी में बदल चुका है, जिसकी गूंज पूरे देश में सुनाई दे रही है। इस हादसे में अब तक 13 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य जिंदगी और मौत के बीच जूझ रहे हैं। लेकिन इस दर्दनाक घटना के बीच एक ऐसे मजदूर की कहानी सामने आई है, जिसने मौत को बेहद करीब से देखा… और किसी तरह खुद को बचा लिया।
हादसे में बचे पश्चिम बंगाल निवासी अजीत दास कर ने उस खौफनाक पल को याद करते हुए बताया कि दोपहर करीब 2:30 बजे, जब सभी मजदूर लंच के बाद काम पर लौटे ही थे, तभी अचानक जोरदार धमाका हुआ। आवाज इतनी भयानक थी मानो कोई मिसाइल गिर गई हो। देखते ही देखते पूरा प्लांट धुएं और आग की लपटों में घिर गया।
अजीत ने बताया कि वे करीब 17 मीटर की ऊंचाई पर पेंटिंग का काम कर रहे थे। धमाका होते ही चारों ओर अफरा-तफरी मच गई। किसी को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि भागें तो कहां भागें। उसी दौरान अपनी जान बचाने के लिए वे पास रखी एक अलमारी में घुस गए। यही फैसला उनकी जिंदगी और मौत के बीच की दूरी बन गया।
लेकिन हर किसी की किस्मत इतनी मजबूत नहीं थी… उनके साथ काम कर रहे कई मजदूर नीचे गिर गए या आग की चपेट में आ गए। कुछ मजदूर जो नीचे करीब 9 मीटर की ऊंचाई पर काम कर रहे थे, वे बुरी तरह झुलस गए। हालात इतने भयावह थे कि कई लोगों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। चारों तरफ सिर्फ चीखें, आग और धुएं का काला गुबार था।
मजदूर के मुताबिक, हादसे के वक्त बॉयलर के पास 40 से 50 मजदूर काम कर रहे थे। शुरुआत में मौत का आंकड़ा कम बताया गया, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, सच्चाई और भी डरावनी होती चली गई। अब तक 13 मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 26 से ज्यादा घायल अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती हैं, जिनमें कई की हालत गंभीर बनी हुई है।
घटना के बाद घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था की गई। रायगढ़ के ओपी जिंदल फोर्टिस अस्पताल में इलाज के दौरान भी कुछ मजदूरों ने दम तोड़ दिया, जिससे मृतकों की संख्या लगातार बढ़ती गई।
इस हादसे पर प्रधानमंत्री Narendra Modi ने गहरा दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों के लिए 2 लाख रुपये और घायलों के लिए 50 हजार रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है। वहीं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने भी मृतकों के परिजनों को 5 लाख रुपये और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता देने का ऐलान किया है।
मुख्यमंत्री ने बिलासपुर कमिश्नर को इस पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए हैं और साफ कहा है कि इस हादसे के लिए जो भी जिम्मेदार होगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि उन सवालों की गूंज भी है जो अब जवाब मांग रहे हैं… आखिर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई? और क्या इस दर्दनाक त्रासदी से कोई सबक लिया जाएगा, या फिर अगली चीख का इंतजार किया


