सहकारिता में भ्रष्टाचार, जिम्मेदार बने हिस्सेदार ?

स्वतंत्र बोल
रायपुर 02 मई 2026.  छत्तीसगढ़ राज्य सरकारी और जिला सहकारी बैंक भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के अड्डे बन गए है। सहकारिता विभाग अंतर्गत आने वालो इन बैंको को दो दो केदार मिलकर भी नहीं सुधार पा रहे या सुधारने की दिशा में काम ही नहीं कर रहे है। जिला सहकारी बैंक रायपुर, जिला सहकारी बैंक अंबिकापुर, जिला सहकारी बैंक राजनांदगांव और अपैक्स बैंक रायगढ़ और बरमकेला ऐसे उदाहरण बन गए है जहा खुले तौर पर बैंकिंग अधिकारियो ने बैंको को डुबाने और लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ा। सहकारिता मंत्री केदार कश्यप और अपैक्स बैंक के प्राधिकृत अधिकारी केदारनाथ गुप्ता भले ही दावे करें पर वास्तविकता उसके उलट है, अगर यह कहे कि केदार की सरंक्षण में भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी हो रही तो अतिश्योक्ति नहीं होगी।

 

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जिला सहकारी बैंक रायपुर में दस करोड़ से अधिक का घोटाला बैंककर्मियों ने किया, कुछ को सस्पेंड और वेतनवृद्धि रोका गया पर सभी आज भी वही जमे है जहा से घोटाले को अंजाम दिया था। जिला सहकारी बैंक दुर्ग में हुए घोटाले तत्कालीन अध्यक्ष प्रितपाल बेलचंदन को जेल की हवा खाना पड़ा, उसी प्रकरण में सीईओ पर आंच नहीं आई। सीईओ अपेक्षा व्यास को हटाने बीजेपी के दिग्गज नेताओ ने पत्र भी लिखा पर सिक्को की खनक से पत्र की आवाज दब गई। लूट खसोट के अड्डे बने इन बैंको को संभालने और सवारने का दावा करने वाले जिम्मेदार उन्ही के हिस्सेदार बनते दिख रहे है।

ED जाँच करने पहुंच गई-
अंबिकापुर में सैकड़ो किसानो के नाम पर फर्जी लोन बांटकर करोडो का सरकारी खजाने को चूना लगाने वालो की जानकारी लेने शनिवार को प्रवर्तन निदेशालय की टीम बैंक पहुंची थी। अंबिकापुर के जिला सहकारी बैंको में केसीसी के बहाने करोडो का खेला किया, तत्कालीन अधिकारी जाँच कर अपराध दर्ज कर खटरल कर्मियों को बर्खास्त भी किया पर अब भी जाँच अधूरी है। अब ईडी की टीम कर्मचारियों के आलावा उन रसूखदारों को पकड़ेगी जो मलाई चाटकर डकार भी नहीं लिए।

 

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बरमकेला में बैंक प्रबंधन ने डाका डाला-
अपैक्स के बरमकेला शाखा में जो हुआ वह ाबंकिंग के इतिहास में शायद ही कही हुआ होगा। बैंक के शाखा प्रबंधक, कैशियर, लिपिक, कंप्यूटर ऑपरटर, और डंडा गार्ड से सामूहिक रूप से सुनियोजित तरीके से 18 करोड़ से अधिक का गबन कर दिया। तीन सालो में की जाँच में अभी 18 करोड़ का खुलासा हुआ, अगर विस्तृत जाँच हो तो मामला 50 करोड़ से अधिक होगा। गबन में तत्कालीन बैंक मैनेजर डीआर बाघमार, एसके साहू, हेमंत चौहान सहायक लेखापाल, लोकेश बैरागी कंप्यूटर ऑपरेटर, रमाकांत श्रीवास, मीनाक्षी मांझी लेखाधिकारी, आशीष पटेल लिपिक, खिरदास महंत डंडा गार्ड, अरुण चंद्राकर डंडा गार्ड बालकृष्ण कर्ष, इन्होने तीन सालो में 18 करोड़ रुपये डकार गए. जाँच हुई तो इसका खुलासा हुआ। सभी पर एफआईआर दर्ज हुआ, गिरफ्तारी हुई जेल गए और जमानत भी मिल गई.. ऑउटसोर्सिंग वालो नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया.. पर घोटालेबाज अब भी निलंबित होकर आधी सैलरी उठा रहे।

बताते है कि जाँच अधिकारी घोटालेबाजो से हिस्सा मांगने लगे थे, अभिषेक तिवारी, हेमंत चौहान, भूपेश चंद्रवंशी, सुनील सोढ़ी ने हिस्सा मांगा। कुछ के खातों में पैसे ट्रांसफर किये गए जिसके प्रमाण स्वतंत्र बोल के पास मौजूद है। उसके बाद भी अपैक्स बैंक प्रबंधन तमाशबीन है और होटलो में बैठकों का दौर जारी है।

 

 

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