पेंशन फाइल आगे बढ़ाने मांगी थी रिश्वत, ACB के जाल में फंसा लिपिक; 6 साल बाद कोर्ट ने सुनाई सजा

स्वतंत्र बोल
अंबिकापुर/रायपुर 16 जून 2026 :  रिश्वतखोरी के एक पुराने मामले में एसीबी विशेष न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाते हुए जल संसाधन विभाग के लिपिक व्ही.के. सिन्हा को तीन वर्ष के सश्रम कारावास और 5 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। आरोपी को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने वर्ष 2020 में रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था।

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मामले के अनुसार, गांधीनगर थाना क्षेत्र के विशुनपुरखुर्द राघवपुरी निवासी लोचन सिंह ने 16 जुलाई 2020 को एंटी करप्शन ब्यूरो, अंबिकापुर में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि उनके पिता लरघुराम जल संसाधन विभाग, अंबिकापुर में चौकीदार के पद पर कार्यरत थे और 30 नवंबर 2015 को सेवानिवृत्त हो गए थे।

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सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें केवल बचत निधि की राशि ब्याज सहित प्राप्त हुई थी, जबकि ग्रेच्युटी और अन्य देय लाभों का भुगतान लंबित था। साथ ही उनका पेंशन प्रकरण भी तैयार नहीं किया गया था। इस संबंध में विभागीय कार्यालय के चक्कर लगाने पर लोचन सिंह की मुलाकात सहायक ग्रेड कर्मचारी व्ही.के. सिन्हा से हुई।

शिकायत के अनुसार, आरोपी कर्मचारी ने पहले भी “खर्चा-पानी” के नाम पर 3 हजार रुपये ले लिए थे, लेकिन इसके बावजूद कोई कार्य नहीं हुआ। बाद में जब दोबारा संपर्क किया गया तो आरोपी ने लंबित कार्यों को जल्द पूरा कराने के बदले 8 हजार रुपये की रिश्वत की मांग की।

लोचन सिंह रिश्वत नहीं देना चाहते थे, इसलिए उन्होंने इसकी शिकायत एसीबी से की। शिकायत के सत्यापन के दौरान रिश्वत की रकम 7 हजार रुपये पर तय हुई। इसके बाद एसीबी ने योजनाबद्ध कार्रवाई करते हुए 13 अगस्त 2020 को आरोपी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया।

बताया गया कि व्ही.के. सिन्हा को कार्यालय के बाहर मुख्य सड़क पर लोचन सिंह से 7 हजार रुपये लेते समय गिरफ्तार किया गया था। ट्रैप कार्रवाई के बाद एसीबी ने पूरे मामले की जांच पूरी कर 22 जून 2021 को विशेष न्यायालय अंबिकापुर में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया।

लंबी सुनवाई और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर एसीबी विशेष न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार दिया। न्यायालय ने व्ही.के. सिन्हा को तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाने के साथ 5 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।

इस फैसले को भ्रष्टाचार के खिलाफ महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है। एसीबी अधिकारियों का कहना है कि शासकीय कार्यों के बदले रिश्वत मांगने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।