स्वतंत्र बोल
रायपुर 25 अप्रैल 2026. महिला बाल विकास में साड़ी खरीदी और सप्लाई को लेकर विभाग के तत्कालीन संचालक रहे पीएस एल्मा ने मनमानी की। एल्मा ने बतौर संचालक पहले खाड़ी एवं ग्रामोद्योग को साडी खरीदने पैसा ट्रांसफर किया, फिर बतौर प्रबंध संचालक खादी एवं ग्रामोद्योग अपने चहेते सप्लाई फर्मो को सीधे कार्यादेश जारी कर दिया।
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साड़ी खरीदी में गड़बड़ी और भ्रष्टाचार की आरोपों की पड़ताल से पता चला कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के महिला बाल विकास ने करीब 2 लाख 3 हजार नग साड़ी खरीदने प्रस्ताव तैयार किया, 500 रुपये प्रति साड़ी के अनुमान से करीब दस करोड़ पंद्रह लाख रुपये खादी एवम ग्रामोद्योग बोर्ड को ट्रासंफर किया। नियमानुसार खरीदी करने बोर्ड एमडी को टेंडर कर वर्कऑर्डर जारी करना था, पर टेंडर ना कर एल्मा ने बतौर प्रबंध संचालक बोर्ड में पंजीकृत दो फर्मो को सहमति के आधार पर सीधे कार्यादेश दे दिया। ये दोनों पंजीकृत फर्म है जागृति उद्योग धमतरी और छत्तीसगढ़ वस्त्र भंडार अभनपुर (बकतरा)..

टेंडर क्यों नहीं ?
साल 2024-25 में महिला बाल विकास ने साड़ी टेंडर प्रक्रिया के माधयम से ख़रीदा था। इसी साल विभाग ने साड़ी का कलर भी बदला, पर साल 2025-26 में बिना टेंडर सीधे सहमति से वर्क आर्डर जारी करने की नौबत क्यों आई ? यह जानना जरुरी है पीएस एल्मा खादी एवम ग्रामोद्योग बोर्ड में सिर्फ दो महीने के लिए बतौर एमडी पोस्टेड रहे, और उसी बीच में ही पूरा खेल हुआ है। बताते है साड़ी के लिए एडवांस भुगतान भी किया गया जिसे ट्रासंफर होने के बाद एल्मा ने 27 नवंबर 2025 के बाद किया।

क्या सप्लायर ने एल्मा को एमडी बनवाया ?
पीएस एल्मा पूर्ववर्ती कांग्रेस की सरकार में धमतरी सहित अन्य जिलों के कलेक्टर रहे। जिस दो पंजीकृत इकाईयों को कार्यादेश दिया गया वे भी धमतरी के केतन दोषी की बताई जा रही है, ऐसे में चर्चा है कि केतन दोषी ने सप्लाई ठेका लेने पीएस एल्मा को एमडी खादी ग्रामोद्योग बनवाया हो ? दरसल इसके पीछे की कहानी ऐसा है केतन दोषी का सप्लाई का काम है, उसे काम देने टेंडर नियमो को दरकिनार किया गया और वह पूववर्ती कांग्रेस की सरकार में धमतरी सहित अनेक जिलों में डीएमएफ और सप्लायर रहा.मौजूदा सरकार में जाँच शुरू हुई तो ईओडब्ल्यू ने उसके धमतरी स्थित महालक्ष्मी ग्रीन्स में छापेमारी करने पहुंची थी।
साड़ी सप्लाई पर ब्रेक-
हाल ही में साड़ी में विवाद उपजने पर महिला बाल विकास विभाग ने फिलहाल साडी सप्लाई पर कुछ दिनों के लिए रोक लगा दिया है। दरअसल विभाग के अधिकारी साड़ी विवाद से फैले रायते को समेटने में व्यस्त है, ऐसे में वे फूंक -फूंक कर कदम रख रहे है। बताते है जब भी यह साडी बटेगी फिर विवाद होना तय है। टेंडर ना कर सहमति के आधार पर दो फर्मो को कार्यादेश देने के सवालो पर एमडी खादी ग्रामोद्योग रीता यादव ने कहा कि
“जब यह वर्कऑर्डर हुआ तब उनकी पोस्टिंग नहीं हुई थी, बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर्स की बैठक में लिए गए निर्णयों के बाद सीधे कार्यादेश दिया गया है।”
साड़ी खरीदी में कमीशनखोरी, डीएमएफ़ घोटाले के आरोपी को मिला वर्कऑर्डर.. तत्कालीन संचालक की संलिप्तता!

