स्वतंत्र बोल
सूरजपुर, 16 मई 2026: सूरजपुर जिले में गायत्री भूमिगत परियोजना से प्रभावित परिवारों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। लंबे समय से रोजगार और पुनर्वास की मांग कर रहे ग्रामीणों के लिए अब नौकरी का रास्ता लगभग साफ हो गया है। जिला पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना समिति की बैठक में बड़ा फैसला लेते हुए प्रभावित परिवारों को रोजगार देने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने पर सहमति बन गई।
यह बैठक केतका स्थित गायत्री भूमिगत परियोजना, विश्रामपुर एसईसीएल क्षेत्र को लेकर आयोजित की गई थी। बैठक में परियोजना से प्रभावित भूमिस्वामियों और उनके आश्रितों के पुनर्वास, मुआवजा और रोजगार जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।
95 रोजगार का प्रावधान, अब आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
बैठक में ग्राम जोबगा की अधिग्रहित निजी भूमि से प्रभावित परिवारों को कोल इंडिया पुनर्वास नीति 2012 के तहत रोजगार देने पर सहमति बनी। प्रभावित परिवारों को रोजगार के दो विकल्प दिए गए थे, जिनमें घटते क्रम की वरीयता सूची वाले विकल्प पर सहमति जताई गई।
समिति ने स्पष्ट किया कि इसी निर्णय के आधार पर अब रोजगार देने की आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी। जानकारी के मुताबिक परियोजना प्रभावितों के लिए कुल 95 रोजगार का प्रावधान किया गया है।
करोड़ों की जमीन गई, अब तक पूरा मुआवजा भी नहीं
बैठक में बताया गया कि गायत्री भूमिगत परियोजना के लिए कुल 288.209 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की गई है, जिसमें 220.784 हेक्टेयर निजी भूमि शामिल है। इस परियोजना से जोबगा, गेतरा और पोड़ी गांव प्रभावित हुए हैं।
ग्राम जोबगा में अकेले 77.69 हेक्टेयर यानी करीब 191.976 एकड़ जमीन अधिग्रहित की गई। मुआवजा निर्धारण के समय यहां 168 खातेदार थे, जबकि अधिग्रहण के समय यह संख्या 161 रही।
निजी भूमि के लिए कुल 20.17 करोड़ रुपये मुआवजा तय किया गया था। हालांकि अब तक केवल 42 खातेदारों को 7.09 करोड़ रुपये का भुगतान हो पाया है, जबकि 126 खातेदारों को अभी भी 13.08 करोड़ रुपये मिलना बाकी है।
प्रभावित परिवारों को जल्द मिलेगा लाभ
बैठक में मौजूद अधिकारियों और समिति सदस्यों ने कहा कि परियोजना प्रभावित परिवारों को नियमानुसार सभी लाभ दिलाने और पुनर्वास प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है। फैसले के बाद प्रभावित परिवारों में उम्मीद और राहत का माहौल देखा जा रहा है।


