स्वतंत्र बोल
महासमुंद 28 मई 2026: छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित करोड़ों रुपये के एलपीजी गैस गबन कांड में पुलिस को बड़ी कामयाबी मिली है। महीनों से फरार चल रहे इस हाई-प्रोफाइल मामले के मुख्य आरोपी संतोष सिंह ठाकुर और उसके बेटे सार्थक सिंह ठाकुर को आखिरकार महाराष्ट्र के कोल्हापुर से गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों आरोपी लगातार ठिकाने बदल रहे थे और पहचान छिपाकर होटल में रह रहे थे।
जैसे ही पुलिस ने बाप-बेटे को दबोचा, पूरे मामले में कई नए और चौंकाने वाले खुलासे सामने आने लगे हैं। इससे पहले इस मामले में जिला खाद्य अधिकारी समेत चार आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं।
सैकड़ों CCTV फुटेज खंगालने के बाद मिला सुराग
पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार ने प्रेसवार्ता में बताया कि सिंघोड़ा थाना में दर्ज एलपीजी गैस गबन मामले में फरार आरोपियों की तलाश के लिए महासमुंद पुलिस की कई टीमें अलग-अलग राज्यों में भेजी गई थीं। रायपुर, कवर्धा, छुईखदान, कान्हा-किसली, कोलकाता, पुणे, मुंबई और कोल्हापुर तक पुलिस लगातार पीछा कर रही थी।
सैकड़ों सीसीटीवी फुटेज, टोल प्लाजा डेटा और तकनीकी जांच के बाद पुलिस को पता चला कि दोनों आरोपी महाराष्ट्र के कोल्हापुर स्थित न्यू चालुक्य होटल में छिपे हुए हैं। इसके बाद स्थानीय पुलिस की मदद से दबिश देकर संतोष सिंह ठाकुर और उसके बेटे सार्थक सिंह ठाकुर को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस ने आरोपी संतोष ठाकुर के कब्जे से 20 हजार रुपये नकद भी बरामद किए हैं।
पूछताछ में खुला करोड़ों की डील का राज
पुलिस पूछताछ में मुख्य आरोपी ने कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं। आरोपी ने बताया कि पूरे मामले में 1 करोड़ 30 लाख रुपये की मांग की गई थी, लेकिन बाद में 90 लाख रुपये में सौदा तय हुआ। आरोपी के मुताबिक पहले 45 लाख और दूसरी बार 15 लाख रुपये दिए गए थे। बाकी 30 लाख रुपये ऑनलाइन सिक्योरिटी के तौर पर ट्रांसफर किए गए थे, जो नकद भुगतान होते ही वापस कर दिए गए।
इस खुलासे के बाद अब पुलिस पूरे नेटवर्क और लेनदेन की कड़ियों को खंगाल रही है।
6 गैस ट्रकों से शुरू हुआ था पूरा खेल
एसपी प्रभात कुमार ने बताया कि सिंघोड़ा थाना में दर्ज अपराध क्रमांक 96/25 के तहत 24 दिसंबर 2025 को एलपीजी गैस से भरे 6 कैप्सूल ट्रकों को जब्त किया गया था। सुरक्षा कारणों और भीषण गर्मी को देखते हुए जिला प्रशासन के निर्देश पर 30 मार्च 2026 को इन वाहनों को खाद्य विभाग की मौजूदगी में ठाकुर पेट्रो केमिकल्स, उरला रायपुर के संचालक संतोष सिंह ठाकुर को सुपुर्द किया गया था।
लेकिन जांच में सामने आया कि सुपुर्द किए गए 5 कैप्सूल ट्रकों में भरी करीब 87 टन एलपीजी गैस गायब कर दी गई। इसकी कीमत लगभग 77 लाख रुपये बताई गई है। पुलिस ने इसे आपराधिक न्यास भंग, कूट रचना और कालाबाजारी का गंभीर मामला मानते हुए केस दर्ज किया था।
अब और बड़े नाम आने की आशंका
इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव, पंकज चंद्राकर, मनीष चौधरी और निखिल वैष्णव समेत चार आरोपी गिरफ्तार होकर जेल जा चुके हैं।
अब मुख्य आरोपी बाप-बेटे की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को इस पूरे गैस घोटाले में और भी बड़े नामों और बड़े नेटवर्क के सामने आने की उम्मीद है।


